
बैतूल। नगरपालिका परिषद का पूर्व में स्थगित विशेष सम्मेलन शुक्रवार को बाल मंदिर सभाकक्ष में दोबारा आयोजित किया गया। इस बार सम्मेलन बिना किसी बड़े विवाद के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, लेकिन शांति के इस माहौल के बीच परिषद ने ऐसे फैसले ले लिए, जो सीधे-सीधे आम नागरिकों की जेब पर असर डालने वाले हैं। बैठक में मध्यप्रदेश नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 138 तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 127 के प्रावधानों का हवाला देते हुए जल, मल एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं के लिए उपभोक्ता शुल्क में भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव पारित कर दिए गए। बैठक में नपाध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर, उपाध्यक्ष महेश राठौर, नपा सीएमओ सतीश मटसेनिया, पार्षदगण सहित नपा कर्मचारी मौजूद थे।
सबसे बड़ा झटका डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण शुल्क में देखने को मिला। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह शुल्क 20 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर सीधे 100 रुपए कर दिया गया, जो कि पांच गुना वृद्धि है। वहीं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कचरा संग्रहण शुल्क 250 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा मैरिज लॉन से कचरा संग्रहण शुल्क 1000 से बढ़ाकर 2500 रुपए और खुले मैदानों में विवाह आयोजनों पर 2000 की जगह 4000 रुपए शुल्क वसूलने का निर्णय लिया गया। यहीं नहीं, परिषद ने फायर एनओसी का शुल्क 500 रुपए से बढ़ाकर 2000 रुपए तथा सेफ्टी टैंक खाली कराने की दर 2000 से बढ़ाकर 3000 रुपए करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया। पानी के टैंकर के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं। घरेलू उपयोग के लिए टैंकर का किराया 250 से बढ़ाकर 400 रुपए और व्यावसायिक उपयोग के लिए 400 से बढ़ाकर 600 रुपए कर दिया गया है। शुल्क वृद्धि को लेकर कुछ पार्षदों ने आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन सीएमओ का तर्क था कि नगरपालिका की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी है, अन्यथा भविष्य में इन सेवाओं का संचालन कठिन हो जाएगा।
सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग होने पर दिखाई सख्ती
बैठक में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती दिखाने का भी ऐलान किया गया। सीएमओ ने बताया कि यदि मैरिज लॉन संचालक किसी आयोजन में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करते पाए गए तो पहली बार 11 हजार, दूसरी बार 21 हजार, तीसरी बार 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा और चौथी बार लॉन में तालाबंदी कर अनुमति निरस्त की जाएगी। वहीं अवैध नल कनेक्शन पर कार्रवाई करते हुए 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाने और दो किश्तों में राशि वसूलने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इधर, परिषद की बैठक के दौरान नगरपालिका कर्मचारियों के वेतन भुगतान की अनिश्चितता का मुद्दा भी गर्माया रहा। आधा सैकड़ा से अधिक कर्मचारी सभाकक्ष के बाहर नारेबाजी करते नजर आए। जब उनकी आवाज अनसुनी की गई तो कर्मचारी बैठक के भीतर पहुंच गए और समय पर वेतन न मिलने को लेकर नाराजगी जताई। इससे कुछ देर के लिए बैठक बाधित हुई। बैठक के बाद सीएमओ ने कर्मचारियों से चर्चा तो की, लेकिन वेतन भुगतान को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पाए, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश साफ दिखाई दिया।
शौचालय बंद होने का मुद्दा भी उठाया गया
हालांकि परिषद ने एजेंडे के सभी 36 विषयों पर विचार-विमर्श कर उन्हें पारित कर दिया। नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान ने सदर में 25 लाख की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय के तीन माह से बंद पड़े होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करोड़ों के चौराहों पर काम हो रहे हैं, लेकिन वार्डों में बजट का बहाना बनाया जा रहा है। पार्षद नंदिनी तिवारी ने टेंडर के बाद भी सडक़ों का काम शुरू न होने पर सवाल उठाए। पार्षद कबीर खान ने गंदे पानी की समस्या और जवाहर वार्ड पार्षद विकास प्रधान ने हाथी नाले के सीमांकन व अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया। कुल मिलाकर, सम्मेलन भले ही शांत रहा, लेकिन फैसलों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आर्थिक संकट का बोझ केवल जनता पर डालकर क्या नगर की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।
Published on:
31 Jan 2026 09:05 pm
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