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बिना अनुमति ड्रिलिंग से टूटी नपा की पाइपलाइन, जवाहर वार्ड की पेयजल आपूर्ति ठप

-निजी टेलीकॉम कंपनी की मनमानी उजागर, दस्तावेज नहीं दिखा पाए अधिकारी, मशीन जब्त। बैतूल। शहर में निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने के नाम पर की जा रही मनमानी एक बार फिर उजागर हो गई है। शुक्रवार सुबह कॉलेज के सामने ड्रिलिंग के दौरान नगरपालिका की पेयजल वितरण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे […]

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-निजी टेलीकॉम कंपनी की मनमानी उजागर, दस्तावेज नहीं दिखा पाए अधिकारी, मशीन जब्त।

बैतूल। शहर में निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने के नाम पर की जा रही मनमानी एक बार फिर उजागर हो गई है। शुक्रवार सुबह कॉलेज के सामने ड्रिलिंग के दौरान नगरपालिका की पेयजल वितरण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे जवाहर वार्ड की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। शनिवार को पूरे दिन वार्डवासी पानी के लिए परेशान रहे और नगरपालिका के दावों की पोल खुल गई।
जानकारी के अनुसार, शहर में मशीन से ड्रिलिंग कर भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। नियमानुसार इसके लिए कंपनी को पहले से तय रूट की अनुमति लेनी होती है, लेकिन संबंधित कंपनी के कर्मचारियों ने जिस स्थान पर ड्रिलिंग की, वहां की अनुमति उनके पास नहीं थी। बावजूद इसके नियमों को ताक पर रखकर ड्रिलिंग की गई, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा। ड्रिलिंग के दौरान नगरपालिका की पेयजल डिस्ट्रीब्यूशन लाइन फूट गई। पानी सडक़ पर बहने लगा और देखते ही देखते जवाहर वार्ड की सप्लाई बंद करनी पड़ी। सूचना मिलते ही नगरपालिका का अमला मौके पर पहुंचा और कंपनी के अधिकारियों से ड्रिलिंग संबंधी अनुमति पत्र और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में सामने आया कि कंपनी को किसी अन्य क्षेत्र में ड्रिलिंग की अनुमति मिली थी, लेकिन बिना सूचना और स्वीकृति के स्थान बदलकर काम किया जा रहा था। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए नगरपालिका ने ड्रिलिंग मशीन को जब्त कर जॉबी अपने कब्जे में ले ली है। साथ ही कंपनी को क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के सुधार कार्य का खर्च उठाने के निर्देश दिए गए हैं। नपा अधिकारियों का कहना है कि रविवार तक पाइपलाइन की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। हालांकि यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में आए दिन पाइपलाइनों में लीकेज और टूट-फूट की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे कई वार्डों में नियमित जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। सवाल यह है कि बिना अनुमति काम करने वाली कंपनियों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई और कब तक शहरवासी ऐसी अव्यवस्था की कीमत चुकाते रहेंगे?