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World Wetlands Day 2026 : राजस्थान में 5 रामसर स्थल, जानिए सांभर झील की अनोखी विशेषताएं, जो पर्यटकों को बनाती है दीवाना

World Wetlands Day 2026 : विश्व आर्द्रभूमि दिवस या विश्व वेटलैंड्स डे पूरे दुनिया में 2 फरवरी को मनाया जाता है। इस बार के विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' है। अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स की सूची राजस्थान में 5 रामसर स्थल को शामिल किया गया है। इनमें से एक सांभर झील की अनोखी विशेषताएं पर्यटकों को दीवाना बना देती है।

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World Wetlands Day 2026 Rajasthan has 5 Ramsar sites know unique features of Sambhar Lake that Tourist crazy

अद्भुत सांभर झील। फोटो पत्रिका

World Wetlands Day 2026 : विश्व आर्द्रभूमि दिवस या विश्व वेटलैंड्स डे पूरे दुनिया में 2 फरवरी को मनाया जाता है। इस बार के विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' है। अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स की सूची में अब तक राजस्थान में 5 रामसर स्थल शामिल हैं। इनमें से एक सांभर झील की अनोखी विशेषताएं पर्यटकों को दीवाना बना देती हैं।

ईरान के रामसर शहर में 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन के तहत आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए पहला वैश्विक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था। यह अंतरराष्ट्रीय समझौता सन् 1975 से लागू हुआ था। जिसके बाद विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी 1997 से मनाया जाने लगा। देश में मौजूदा वक्त में रामसर स्थल की संख्या 91 है। वहीं राजस्थान में 5 रामसर साइट हैं।

राजस्थान में 5 रामसर साइट

राजस्थान में मौजूदा वक्त 5 रामसर साइट हैं। इसमें केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (1981), दूसरी सांभर झील (1990), उदयपुर का बर्ड विलेज मेनार, फलोदी का खींचन गांव और सलीसेढ़ झील शामिल हैं।

सांभर झील की अनोखी विशेषताएं बनाती हैं पर्यटकों को दीवाना

राजस्थान के जयपुर-नागौर जिलों में स्थित सांभर झील को 1990 में रामसर स्थल घोषित किया गया है। यह झील देश की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है। अरावली पहाड़ियों से घिरी यह झील 230 वर्ग किमी में फैली है। यहां लगभग 1000 वर्षों से नमक का उत्पादन किया जा रहा है। इस झील से देश के लगभग 9 फीसदी नमक का उत्पादन होता है। इस झील का जलस्तर मानसून में 3 मीटर तक और सूखे में 60 सेंटीमीटर तक रहता है।

सर्दियों में सांभर झील में हजारों प्रवासी राजहंस (फ्लेमिंगो) और अद्भुत पक्षियों का बसेरा होता है। झील का अनोखा रंग उसमें मौजूद विशेष शैवाल और बैक्टीरिया की वजह से बदलता है। पूर्णिमा की रात को यह सफेद रेगिस्तान चांदी की तरह चमकता है। पर्यटकों के लिए यह एक अद्भुत दृश्य होता है। झील में मुख्य रूप से 5 नदिया समोद, खारी, मंथा, खंडेला और मेधा अपना पानी लाती हैं।

यह झील महाभारत काल से जुड़ी है, जिसका संबंध राजा ययाति और देवयानी से है। इसके आसपास शाकम्भरी माता का प्राचीन मंदिर है।