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मातृत्व वंदना योजना में भिण्ड पिछड़ा, दूसरे प्रसव पर उपलब्धि सिर्फ 16.9 प्रतिशत

प्रथम प्रसव पर महिला को पांच हजार रुपए दो किस्तों में डीबीटी किए जाते हैं। जबकि दूसरे प्रसव में बेटी होने पर छह हजार रुपए एकमुश्त दिए जाते हैं। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण और वेतन हानि की भरपाई के लिए वर्ष 2017 से संचालित है।

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भिंड

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Vikash Tripathi

Feb 05, 2026

bhind mews

भिण्ड. प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के वार्षिक लक्ष्य में जिले की स्थिति ठीक नहीं है। प्रथम प्रसव वाली महिलाओंं को लाभ दिलाने के मामले में जनवरी के मध्य तक महज 55.1 प्रतिशत है और दूसरे प्रसव पर यह उपलब्धि महज 16.9 प्रतिशत पर सिमट गई है।

महिला बाल विकास के माध्यम से केंद्र प्रवर्तित इस योजना में प्रगति की यह स्थिति तब है जब 10 परियोजना अधिकारी, 4500 से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका एवं डीपीओ व अन्य अधिकारियों का बड़ा अमला उपलब्ध है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल दो हजार 452 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नौ हजार 524 का कुल लक्ष्य प्रथम प्रसव पर था, जनवरी के मध्य तक महज पांच हजार 245 की पूर्ति होकर उपलब्धि का प्रतिशत 55.1 पर सिमट गई। द्वितीय प्रसव पर बालिका होने की स्थिति में दिए जाने वाले लाभ के चार हजार 515 का लक्ष्य था, विभाग महज 763 की पूर्ति कर पाया जो लक्ष्य का 16.9 प्रतिशत है।

मौ एवं रौन-मिहोना की स्थिति सबसे खराब

रौन-मिहोना में 250 केंद्रों के माध्यम से 971 के लक्ष्य के विरुद्ध 422 की पूर्ति हो पाई, जो 45.5 प्रतिशत ही है। वहीं द्वितीय प्रसव में बालिका होने पर दिए जाने वाले लाभ की स्थिति में मौ की स्थिति बेहद खराब है। यहां 203 के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध महज 21 को लाभ दिया जा सका जो, लक्ष्य का 10.3 प्रतिशत ही है। रौन-मिहोना में 460 के लक्ष्य पर लाभ 49 को ही दिया जा सका, जो लक्ष्य का 10.7 प्रतिशत है। मेहगांव में भी 628 के विरुद्ध 76 को लाभ मिला, जो 12.1 प्रतिशत है।
द्वितीय प्रसव बालिका पर लक्ष्य और पूर्ति

परियोजना लक्ष्य उपलब्धि प्रतिशत

अटेर 633 138 21.8
बरोही 171 26 21.8
भिण्ड ग्रा. 661 86 13.0
भिण्ड श. 330 84 25.5
गोहद 626 134 21.4
गोरमी 203 30 14.8
लहार 600 119 19.8
मौ 203 21 10.3
रौन/मिहोना 460 49 10.7
मेहगांव 628 76 12.1
कुल 4515 763 16.9
आंगनबाडिय़ों के माध्यम से लक्ष्य पूर्ति का प्रयास किया जाता है। स्वयं हितग्राही भी अपना पंजीयन करवा सकते हैं। द्वितीय प्रसव में बेटी वाले मामले कम आते हैं, लक्ष्य पूर्ति का प्रयास किया जा रहा है।
पवन तिवारी, प्रभारी डीपीओ, भिण्ड।