
उद्योगपति रामलाल गिरधर ( फोटो: पत्रिका)
Real Life Motivational Story: संघर्ष अगर ईमानदारी और परिश्रम से जुड़ जाए, तो सफलता की कहानी खुद लिखी जाती है। भिवाड़ी के उद्योगपति रामलाल गिरधर की जीवन यात्रा इसका जीवंत उदाहरण है। बेहद साधारण हालातों में जीवन शुरू करने वाले रामलाल गिरधर आज करीब 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले उद्योग समूह के संचालक हैं और सैकड़ों लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
रामलाल गिरधर का जन्म 26 जनवरी 1952 को गांव सीवन, जिला कैथल (हरियाणा) में हुआ। पिता ठाकरदास गिरधर की राशन की दुकान थी और वे पाकिस्तान के मुल्तान से भारत आए थे। वर्ष 1964 में मां बच्चों को लेकर दिल्ली आ गईं। उस समय रामलाल आठवीं कक्षा के छात्र थे। पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। मां स्वेटर बुनकर परिवार चलाती थीं, जिसके बदले उन्हें एक-दो रुपए प्रति स्वेटर मिलते थे।
परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही आत्मनिर्भर बनने की सीख दे दी। कक्षा 9 में स्कूल जाने से पहले घर के आगे दूध बेचना शुरू किया। इससे रोज पांच से सात रुपए मिलने लगे। एक साल बाद स्कूल से लौटकर शादीपुर डिपो के सामने बर्फ बेचना शुरू किया। कक्षा 11 में पढ़ाई का दबाव बढ़ा तो ये काम छोड़ दिए।
11वीं के पेपर देने के बाद मित्र सतीश ओबराय के साथ रोजगार की तलाश शुरू की। UPSC गेट के सामने प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें साइकिल पर ले जाकर बेचना शुरू किया। घर से यह स्थान करीब 20 किलोमीटर दूर था, इसलिए एक दिन सतीश और एक दिन रामलाल जाते थे। इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राचार से बीए भी किया। किताबें बेचकर पूंजी जोड़ी और कालिंदी कॉलेज के पास किराए पर दुकान ली। प्रतियोगी परीक्षाओं के दस वर्षों के प्रश्नपत्र खुद प्रकाशित कर बेचे। सामान्य ज्ञान की किताबें भी छपवाईं। मेहनत रंग लाई और काम बढ़ता गया।
1979 में भाई के साथ मोतीनगर में किराने की दुकान शुरू की। वर्ष 1980 में उधार लेकर जेएल रोड पर नई दुकान खोली। व्यापार बढ़ा, लेकिन पूंजी की कमी आई। दो मित्रों ने मदद की और आगे का रास्ता खुला। एक मित्र के साथ हरिनगर (दिल्ली) में खाद्य उत्पादों की कंपनी से जुड़ाव हुआ। वर्ष 2000 में साझेदारी की और भुना दलिया, इलायची सहित अन्य उत्पाद पैक कर बेचने लगे। इसी दौरान सारा काम दिल्ली से भिवाड़ी शिफ्ट किया और सोयाबरी मशीन लगाई।
2008 में साझेदार अलग हो गए, लेकिन सोयाबरी का काम तेजी से बढ़ा। सालाना टर्नओवर एक से सवा करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसके बाद री-पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क विकसित किया। आज भिवाड़ी में उनकी तीन फैक्टरियां हैं, जहां करीब 200 कर्मचारी कार्यरत हैं। वर्तमान में कंपनी का टर्नओवर लगभग 100 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
रामलाल गिरधर कहते हैं कि सफलता मेहनत, लगन और ईमानदारी से ही मिलती है। किसी भी सफल व्यक्ति के संघर्ष को समझना जरूरी है। वे मानते हैं कि सरकार को टैक्स देने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, यह भी सफलता का हिस्सा है। 74 वर्ष की उम्र में भी वे किसी काम से पीछे नहीं हटते।
फैक्टरी की सफाई हो या कोई अन्य कार्य, वे खुद करने से नहीं हिचकते। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है। यही वजह है कि उनके यहां 35 साल से काम कर रहे कर्मचारी आज भी जुड़े हुए हैं। हमारे लिए कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी नहीं, हमारा परिवार हैं।
Updated on:
02 Feb 2026 02:34 pm
Published on:
02 Feb 2026 01:33 pm
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