
bhopal green cover decreasing citizens express concern
bhopal news: मध्यप्रदेशकी राजधानी भोपाल में कभी बीआरटीएस, कभी सड़क निर्माण तो कभी कार्यालयों को शिफ्ट करने के नाम पर लगातार पेड़ों की कटाई का दृश्य दिखाई देता है। अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेगे। तरक्की के नाम पर पेड़ों की कटाई पर्यावरण तो बिगाड़ ही रही है साथ ही शहर की खूबसूरती को भी कम कर रही है।
तेजी से कट रहे पेड़ों के समाधान के लिए ज़रूरी है कि अवैध कटाई पर सख़्ती से रोक लगे और विकास कार्यों के साथ अनिवार्य वृक्षारोपण किया जाए। हर नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसे गोद लेना चाहिए और उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। स्कूल, कॉलोनियाँ और कार्यालय भी पहल को सामूहिक रूप से अपनाएं। जब लोग पेड़ों को अपनी ज़िम्मेदारी मानकर उनकी परवरिश करेंगे, तभी भोपाल को स्वच्छ हवा, हरियाली और सुरक्षित भविष्य मिल पाएगा।
सत्यम चतुर्वेदी, सराफा चौक, पुराना भोपाल
भोपाल की पहचान यहां के झीलों और हरियाली से है, लेकिन धीरे-धीरे यह समाप्त हो रही है। चाहे सड़क निर्माण हो या अन्य विकास कार्य, जिस हिसाब से पेड़ कट रहे हैं, उससे पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। पहले दानिश कुंज सड़क पर सड़कों के बीच और आसपास हरे भरे कई नीम के पेड़ थे, लेकिन सड़क निर्माण के कारण वह पूरे पेड़ दो साल पहले काट दिए गए। अब वहां से हरियाली गायब हो गई है।
प्रियंका औजेकर, प्रियंका नगर
लगातार हो रही पेड़ों की कटाई चिंता का विषय है। शहर का विकास भी जरूरी है, लेकिन पेड़ काटकर और हरियाली बर्बाद करके नहीं। तुलसी नगर, शिवाजी नगर सहित अनेक स्थानों से कई हरे भरे पेड़ पहले काटे गए, अब भी शहर में अनेक स्थानों पर पेड़ों की कटाई चल रही है। इसके लिए ठोस नीति बनाकर काम करने की आवश्यकता है।
प्रकाश मालवीय, बरखेड़ी
शहर में बढ़ता सीमेंट का जाल गंभीर चिंता का विषय है। डर है भोपाल में भी दिल्ली जैसे हालात न बन जाए। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, साथ ही पर्यावरण प्रेमियों को एकसाथ मिलकर पर्यावरण की रक्षा करना चाहिए, ताकि शहर की ग्रीनरी बनी रहे।
यश जैन, इतवारा
विकास के नाम पर लगातार और जहां जरूरत नहीं है, वहां भी हरे भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। कुछ समय पहले अयोध्या बायपास पर पेड़ काटे थे, अब नापतौल विभाग में खाद्य भवन के निर्माण के नाम पर पेड़ काटने की तैयारी है, जबकि यहां भवन बनाने का कोई औचित्य ही नहीं है। हम लगातार इसका विरोध भी कर रहे हैं।
अनिल वाजपेयी, कर्मचारी नेता, नर्मदापुरम रोड
बदलते वक्त के साथ विकास भी जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ करना सरासर गलत हे। सरकार यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं कि पेड़ लगाओ लेकिन पेड़ को बड़ा होने में सालों लगते हैं। इसलिए ऐसी योजना बनाए, जिससे हमे पुराने पेड़ों को काटने की जरूरत न पड़े। पेड़ पौधों का संरक्षण जरूरी है।
शैलेष सेन, कोलार रोड
स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण संतुलन जरूरी है। आज सौ नए पेड़ लगाने का एग्रीमेंट कर 10 पुराने पेड़ काट दिए जाते हैं, लेकिन नए पेड़ लगाने में महज खानापूर्ति होती है। इस ओर ध्यान देना जरूरी है। नए और पुराने शहर में पिछले दस सालों में हजारों पेड़ कट चुके है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। पेड़ कटने पर सख्ती करना जरूरी है।
निहाल साहू, कायस्थपुरा
Published on:
07 Feb 2026 10:53 pm
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