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अपनी 1 गलती के कारण बुजुर्ग ने गवाएं दिए ‘57.20 लाख’ रुपए, आप न करें

Digital arrest: ठगों ने एटीएस अधिकारी बनकर बात कर रहे प्रेमकुमार ने बताया कि तुम्हारे खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है....

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digital arrest

digital arrest प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

Digital arrest: आतंकवाद निरोधक दस्ता और राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर 79 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखा कर करीब दो महीने तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए 57 लाख 20 हजार रुपये की ठगी कर ली। इस दौरान जालसाजों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। मामले में साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल ने 24 जनवरी को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं मोबाइल नंबर और बैंक खाता डिटेल के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

गिरफ्तार करने का बनाया दबाव

साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस ने बताया कि ई-7 अरेरा कॉलोनी निवासी 79 वर्षीय राजेन्द्र कुमार दुबे के मोबाइल पर 24 नवंबर 2025 को एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम निरीक्षक रंजीत कुमार बताया और कहा कि उनके खिलाफ धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। इसके बाद बुजुर्ग को डराते हुए कहा कि दो घंटे के भीतर पुणे पहुंचकर अपना बयान दर्ज कराना होगा, नहीं तो गिरफ्तारी की जाएगी। वहीं दुबे ने बुजुर्ग होने का हवाला देकर पुणे जाने में असमर्थ जताया तो कॉल करने वाले ने उन्हें एटीएस विभाग के प्रेमकुमार नामक अधिकारी से जोड़ दिया।

वारंट का डर दिखाकर जुटाई संपत्ति की जानकारी

ठगों ने एटीएस अधिकारी बनकर बात कर रहे प्रेमकुमार ने बताया कि तुम्हारे खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और आगे की कार्रवाई के लिए उन्हें सदानंद दांते नामक पुलिस अधिकारी से बात करनी होगी। इसके बाद सदानंद दांते ने उनसे फोन पर बातचीत करते हुए उनकी संपूर्ण संपत्ति की जानकारी ली। डर की वजह से अपनी 30 लाख रुपये की एफडी, सोना, वाहन और मकान से संबंधित जानकारी ठगों को दे दी।

रुपए कराए ट्रांसफर, भेजें फर्जी रसीद

ठगों के निर्देश पर बुजुर्ग दुबे ने 26 नवंबर 2025 को अपनी 30 लाख रुपये की एफडी तुड़वा कर राशि बचत खाते में डलवाई और इंडसइंड बैंक के एक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दी। इसके कुछ समय बाद फिर कॉल कर बताया गया कि जमानत प्रक्रिया के लिए 5 लाख रुपये और जमा करने होंगे। फरियादी ने अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि उनके पास केवल 3 लाख 80 हजार रुपये उपलब्ध हैं। इस पर ठगों ने उसी राशि को तुरंत भेजने के लिए दबाव बनाया। दुबे ने 29 नवंबर 2025 को 3 लाख 80 हजार रुपये एक अन्य बैंक खाते में बैंक से ट्रांसफर किए। इसके बाद ठगों ने 30 लाख रुपये की एक फर्जी रसीद वाट्सएप में भेजी।

फिर दिखाया एनआइए का डर

इसके बाद अन्य मोबाइल नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी प्रदीप लाल बताया। उसने कहा कि अब पूरा मामला एनआइए के अधीन है और आगे केवल एनआइए अधिकारी ही संपर्क करेंगे।

जमानत का डर दिखाकर मांगे 50 लाख

1 दिसंबर 2025 को सदानंद दांते ने दुबे को फोन कर कहा कि मामला 80 प्रतिशत साफ हो चुका है, लेकिन शेष 20 प्रतिशत प्रक्रिया के लिए 50 लाख रुपये की जमानत राशि और जमा करनी होगी। गिरफ्तारी और बदनामी के डर से फरियादी पूरी तरह घबरा गए। उन्होंने अपना सोना एक निजी वित्तीय संस्था में गिरवी रखकर 23 लाख 40 हजार रुपये की व्यवस्था की और 2 दिसंबर 2025 को यह राशि बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में भेज दी। इस तरह तीन अलग-अलग लेन-देन में ठगों ने कुल 57 लाख 20 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली।

सुप्रीम कोर्ट का भेजा फर्जी वारंट

लाखों रुपये लेने के बाद ठगों ने एनआईए, सर्वोच्च न्यायालय और भारतीय रिजर्व बैंक के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट और कई दस्तावेज भी भेजे और शिकायत के साथ संलग्न किया गया है। कुछ समय बाद जब दुबे ने दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। इसके बाद उन्होंने अपने साले दीपक जोशी को पूरी घटना बताई, जिन्होंने इसे डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर साइबर ठगी बताया। फिर शिकायत देकर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।

आप न करें ये गलती

डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों से बचने के लिए, याद रखें कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर कभी गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है। अनजान वीडियो कॉल न उठाएं, व्यक्तिगत जानकारी/OTP साझा न करें, और डराने पर तुरंत कॉल काट दें। तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर पर रिपोर्ट करें।