
heatwave प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
MP News: नीति आयोग द्वारा वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों की भावी महामारी से निपटने की तैयारी करने का आह्वान किया है। इस बीच भोपाल स्वास्थ्य समिति ने हीट वेव से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले शहर के अरेरा कॉलोनी, गुलमोहर और आशा निकेतन क्षेत्र में उच्च जोखिम क्षेत्र चिह्नित किया है। सस्टेनेबल इनवायरनमेंट एण्ड इक्कोलॉजिकल डेवलपमेंट सोसाइटी के विशेषज्ञों के अनुसार तीनों वार्ड में मिट्टी में नमी कम होने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से गर्मी का असर बढऩे का अनुमान है।
इन वार्डों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, बीपी, हार्ट अटैक, किडनी रोग, दमा, सांस की बीमारियों और बुजुर्गों की परेशानियों से निपटने के लिए अलग से एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में संभावित भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
बताया गया कि 2024 में इन तीनों वार्डों में हीट वेव चली थी, जिससे क्षेत्र के 45 से 50 प्रतिशत लोग प्रभावित हुए थे। वर्ष 2025 में हीट वेब से राहत रही, लेकिन जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में वार्ड 48, 49 और 50 में फिर से हीट वेव चलने की आशंका है।
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इसी अनुमान के आधार पर हीट वेव से होने वाले स्वास्थ्य संकट से मुकाबला करने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है सीएमएचओ डॉ. शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जलवायु जनित बीमारियों की पहचान त्वरित इलाज और रेफरल फील्ड स्तर पर निगरानी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2024 की भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेसर, हार्ट और किडनी के रोगियों की हालत बिगड़ी। दमा और सांस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर अचानक दबाव बढ़ गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार उस दौरान तीन वार्ड के 45 से 50 प्रतिशत हीट वेब से प्रभावित हुए थे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि भोपाल में सामान्य तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से से 23 डिग्री अधिक बढ़ता है, तो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट और सांस संबंधी रोगों के मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। सीएमएचओ के अनुसार 24 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान तक निरोग लोगों को कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। लगातार 42 डिग्री या इससे अधिक तापमान रहने पर हीट स्ट्रोक दिल का दौरा और ब्रेन स्ट्रोक किडनी फेल्योर मानसिक तनाव और डिहाइड्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
Updated on:
29 Jan 2026 04:07 pm
Published on:
29 Jan 2026 04:06 pm
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