
MP News Emotional News(photo:AI)
MP News: हरदा से अपनी दो साल की बच्ची को बचाने की आखरी उम्मीद लेकर भोपाल आए पिता को क्या पता था कि हमीदिया अस्पताल से वह बेटी की सांसें नहीं, बल्कि उसका शव लेकर लौटेंगे। न्यूमोनिया से पीड़ित मासूम का इलाज चल रहा था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद जो हुआ, उसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
पिता जब शव वाहन लेने पहुंचे तो उनसे पहले डेथ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट मांगा गया। सर्टिफिकेट बनवाने की औपचारिकताओं में समय लगा, लेकिन असली झटका तब लगा जब एंबुलेंस चालक ने कहा कि यह शव वाहन भोपाल जिले के बाहर नहीं जाएगा। कारण बताया गया कि शासकीय नि:शुल्क शव वाहन सेवा सिर्फ उसी जिले के निवासियों के लिए है, जहां मौत हुई हो।
बेटी को खो चुके पिता की हालत पहले से ही बेबस थी। वह फूटफूट कर रो पड़े। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए पहले ही उधार लेना पड़ा था। अब शव ले जाने के लिए पैसे नहीं हैं। बच्ची तो चली गई, अब उसे घर तक भी नहीं ले जा पा रहा ये कहते हुए उनका गला भर आया। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं है। एम्स और हमीदिया अस्पताल में रोजाना 8 से 10 लोग शव वाहन के अभाव में भटकते हैं।
कारण, यहां पर अन्य जिलों के मरीज बेहतर इलाज के लिए आते हैं। गरीब परिवारों के लिए यह व्यवस्था किसी सजा से कम नहीं। दूसरी ओर निजी एंबुलेंस संचालक प्रति किलोमीटर के आधार पर 7 रुपए चार्ज वसूलते है। ऐसी स्थिति में प्राइवेट शव वाहन ही इनका सहारा है।
सरकार की शासकीय नि:शुल्क शव वाहन सेवा का उद्देश्य मृतक को सम्मानपूर्वक निवास स्थल या श्मशान घाट तक पहुंचाना है। इसके लिए डेथ डिक्लेरेशन फॉर्म, अस्पताल की सील और डॉक्टर के हस्ताक्षर पर्याप्त माने गए हैं। हेल्पलाइन नंबर भी जारी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। शव वाहन की सेवा प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 0755244 0502, 6269907250, 6269906944 पर संपर्क कर सकते हैं।
अधिकारियों से आश्वासन मिला है कि जहां मेडिकल कॉलेज हैं, वहां अन्य जिलों के लिए भी शव वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस दिशा में काम चल रहा है।
-मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल
Published on:
03 Feb 2026 09:50 am
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