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IPS प्रमोशन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, अब आईजी पोस्ट के लिए करना होगा ये काम

IPS promotions: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इससे केंद्र में खाली पदों का संकट खत्म करने की कोशिश है।

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भोपाल

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Akash Dewani

Feb 02, 2026

Union Home Ministry major decision IPS promotions central deputation experience mandatory mp news

Central Home Ministry major decision on IPS promotions (फोटो- ANI)

MP News: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस अधिकारियों के लिए वरिष्ठ केंद्रीय पदों पर नियुक्ति (IPS promotions) के नए नियम लागू किए है। नए नियमों के तहत आईजी जैसे पदों के लिए अब एसपी या डीआईजी स्तर पर कम से कम दो साल का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव होना अनिवार्य किया गया है। गृह मंत्रालय के जारी नए आदेश के मुताबिक 2011 बैच और उसके बाद के आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव जरूरी होगा। गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को यह निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले का असर मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारियों पर भी साफ तौर पर पड़ेगा।

200 से ज्यादा पद पड़े खाली

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिनियुक्ति नियमों में बदलाव इसलिए भी किया गया है ताकि केंद्र में आईपीएस अधिकारियों के संकट को खत्म किया जा सके। फिलहाल केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए 700 से ज्यादा पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन मौजूदा समय में 200 से अधिक पद खाली पड़े है। खाली पदों में ज्यादातर डीआईजी और एसपी के पद शामिल है।

केंद्र-राज्य संतुलन साधने की कोशिश में गृह मंत्रालय का फैसला

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यह नया नियम लागू करने का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर वरिष्ठ पुलिस नेतृत्व को सुदृढ़ बनाना और केंद्रीय पक्ष पर IPS अधिकारियों की कमी को पूरा करना है। अधिकारियों के अनुसार, कई वर्षों से राज्य सरकारें पर्याप्त संख्या में अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए नहीं भेज रही थीं, जिससे केंद्रीय पुलिस संगठन और सशस्त्र बलों में एसपी और डीआईजी स्तर पर पद भरे नहीं जा पा रहे थे।

नए नियम के तहत 2011 बैच और उसके बाद के अधिकारियों को एसपी या डीआईजी स्तर पर कम से कम दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव प्राप्त करना अनिवार्य होगा, तभी वे केंद्र में IG या समकक्ष पदों के लिए योग्य माने जाएंगे। इससे न केवल अनुभवयुक्त नेतृत्व सुनिश्चित होगा बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संतुलित सेवा अनुभव भी बढ़ेगा। (MP News)