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इंतजार खत्म… एमपी के ’65 गांवों’ तक पहुंचेगा तवा डैम का पानी

MP News: गांव वालों के पास खेत तो थे लेकिन पानी नहीं था, ये 75 वर्षों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब जाकर इन्हें कामयाबी मिली है।

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irrigation water

irrigation water (Photo Source - Patrika)

MP News: एमपी के लोगों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। नर्मदापुरम के माखननगर (बाबई) और सोहागपुर के 63 गांवों को 75 सालों के इंतजार के बाद सिंचाई का पानी मिलेगा। सरकार ने इन गांवों में पानी पहुंचाने के लिए दो सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन पर 215 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

ये परियोजनाएं किसी नदी पर नहीं बनाई जाएंगी, बल्कि तवा बांध की दायीं तट नहर से लिफ्ट करके पानी लिया जाएगा। इस पानी से 10 हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। इन गांव वालों के पास खेत तो थे लेकिन पानी नहीं था, ये 75 वर्षों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब जाकर इन्हें कामयाबी मिली है।

किस परियोजना के लिए कहां से पानी

परियोजना 1: इसके लिए दांयी तट नहर की बागरा शाखा से पानी लिया जाएगा। इस पर 86.76 करोड़ खर्च होंगे। माखन नगर और सोहागपुर के 33 गांवों के 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।

परियोजना 2: दायीं तट नहर की पिपरिया शाखा से पानी लिया जाएगा। यह सोहागपुर तहसील के 30 गांवों का 6000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करेगा। इस पर 128.71 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

तहसील को लिफ्ट करके देंगे पानी

तवा परियोजना के दाईं तट की ओर से एक बागरा शाखा है। वहां से लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से सुहागपुर व बाबई दो तहसील को लिफ्ट करके पानी दिया जाएगा और उसी के साथ दाईं तट के पिपरिया शाखा से सोहागपुर तहसील को पानी दिया जाएगा।

किया गया स्वागत

सिंचाई परियोजनाओं की सौगात मिलने से खुश स्थानीय किसान, स्थानीय विधायक व जनप्रतिनिधि मंगलवार शाम मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर स्वागत किया। सीएम ने कहा कि कोई भी क्षेत्र हो, जहां जो जरूरत होगी, उसे हर हाल में पूरा करेंगे। सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने के लक्ष्य को पूरा करने सूखे क्षेत्रों में सिंचाई का पानी पहुंचाएंगे।

बता दें कि भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के विकास, पर्यावरण संरक्षण, सिंचाई और रोजगार से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने पंचमढ़ी नगर के नजूल क्षेत्र को अभयारण्य सीमा से बाहर करने से लेकर टाइगर रिज़र्व के बफर क्षेत्रों के विकास और युवाओं को विदेश में रोजगार दिलाने तक के प्रस्तावों पर मुहर लगाई।

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