
Ajit Pawar Death in a plane Crash told about mp model and ladli behna yojana(photo:Ajit PAwar FB)
Ajit Pawar Death in Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार नहीं रहे। एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। आज अचानक उनके ऐसे चले जाने से एमपी के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। इस शोक की घड़ी में उनकी बातें अकस्मात ही याद आ रही हैं। मध्य प्रदेश को लेकर दिया गया उनका बयान भी अभी याद आ रहा है। प्रदेश के बाहरी नेता होते हुए भी उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकारों की जीत का श्रेय मध्य प्रदेश को दिया था। उन्होंने सार्वजनिक मंच से मध्यप्रदेश की सियासी रणनीति, मध्यप्रदेश मॉडल की प्रशंसा करते हुए कहा था कि कैसे मध्य प्रदेश मॉडल देशभर के लिए प्रेरणा और सीख का उदाहरण बना। उन्होंने कैसे प्रदेश की लाड़ली बहना योजना की प्रशंसा करते हुए कहा था महिलाओं को लेकर चलाई गई योजनाओं ने चुनावी जीत की दिशा तय की।
दरअसल प्रदेश की राजनीति में अजित पवार का एक बयान आज फिर जहन में आया है। अजित पवार ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि मध्य प्रदेश की 'लाड़ली बहना योजना' ने पूरे देश की राजनीति को एक नया संदेश दिया है। उनका कहना था कि इसी योजना से प्रेरणा लेकर महाराष्ट्र में 'लाड़की बहिन योजना' लाई गई और इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा।
अजित पवार का यह बयान सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक स्वीकारोक्ति माना गया। उन्होंने माना कि 'मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की पहल ने यह साबित कर दिया कि सीधी मदद कैसे वोट बैंक में बदल सकती है।' वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह बयान दरअसल बड़ा संकेत देता है कि भविष्य की राजनीति में विकास से ज्यादा 'डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम' राजनीतिक पार्टियों की जीत-हार की निर्णायक होंगी।
मध्य प्रदेश में लागू लाड़ली बहना योजना पहले ही राष्ट्रीय राजनीति में मिसाल बन चुकी है। लेकिन जब महाराष्ट्र के ताकतवर नेता अजित पवार ने खुद इस मॉडल को चुनावी जीत की कुंजी बताया तब ये यह योजना एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई थी।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अजित पवार का ये बायान महज तारीफ नहीं था, इसके पीछे तीन बड़े राजनीतिक कारण थे
1- महिला वोट बैंक की ताकत स्वीकार करनी होगी- अजित पवार ने माना कि मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को सीधे जोड़ा, महिलाओं को मिला सीधा आर्थिक लाभ वोट बैंक में बदल गया। उन्होंने साफ किया कि चुनाव अब सिर्फ भाषण नहीं, सीधे जेब तक पहुंचने वाली योजनाओं से जीते जाते हैं।
2- महाराष्ट्र की लाड़की बहिना योजना को सही ठहराने के लिए- दरअसल महाराष्ट्र में जब लाड़की बहिन योजना लाई गई, तब विपक्ष ने कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि क्या यह चुनावी लालच है? क्या ये कॉपी पेस्ट पॉलिसी है? विपक्ष के इन सवालों का जवाब अजित पवार ने एमपी का उदाहरण देकर दिया। उन्होंने कहा कि अगर मध्य प्रदेश मॉडल काम कर सकता है, तो महाराष्ट्र क्यों नहीं? उनका मतलब साफ था कि एमपी को सक्सेस मॉडल बताकर अपनी योजना को उन्होंने सही साबित किया।
3- राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश- अजित पवार का मध्य प्रदेस मॉडल और लाड़ली बहना योजना को लेकर चर्चा में रहा बयान केवल महाराष्ट्र की राजनीति तक सीमित नहीं था। अजित पवार दिखाना चाहते थे कि आने वाले चुनावों में महिला केंद्रित योजनाएं निर्णायक भूमिका में होंगी। जो सरकार महिलाओं को सीधा लाभ देंगी वही टिकेगी। इस बयान से उनका संदेश स्पष्ट था कि बीजेपी शिवराज सरकार का मॉडल चुनावी तौर पर बेहद असरदार रहा है। उनका कहना यही था कि देशभर की राजनीति के लिए लाड़ली बहना योजना राजनीति का रेफरेंस प्वॉइंट बन गई। दूसरी पार्टियां भी अब इसी तरह की योजनाओं की लाइन में आ गई हैं।
अजित पवार के बयान को सीधा एक सियासी संदेश कहा जा सकता है। आने वाले चुनावों में महिला वोट बैंक सबसे बड़ी ताकत रहेगा। मध्य प्रदेश का मॉडल अब सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति बन चुका है। दूसरे राज्यों की सरकारें भी MP जैसी योजनाओं की ओर बढ़ सकती हैं।
बता दें कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी भोपाल के भेल एरिया स्थित जंबूरी मैदान से लाड़ली बहना योजना की शुरुआत की थी। तीन साल पहले योजना की लॉन्चिंग के दौरान इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में पूरे प्रदेश से लाखों महिलाएं पहुंची थीं। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना को महिलाओं को समृद्ध और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने वाला अभियान नहीं बल्कि महाअभियान बताया था। आज इस योजना को जारी रखने की सारी जिम्मेदारियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निभा रहे हैं। वहीं 1000 रुपए से शुरु हुई इस योजना की राशि तीन साल में बढ़कर 1500 रुपए कर दी गई है। भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हुई इस योजना के तहत 2028 तक राशि बढ़ाकर 3000 रुपए किए जाने के दावे भी सरकार ने किए हैं।
Updated on:
29 Jan 2026 01:17 pm
Published on:
28 Jan 2026 01:43 pm
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