
चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम को संबोधित करते चिकित्सक।
पीबीएम अस्पताल के शिशु रोग विभाग के तत्वावधान में निरंतर चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बीकानेर संभाग के बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली, आधुनिक और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जी. एस. तंवर ने कहा कि बाल गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती बच्चों में किडनी रोग गंभीर बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में शीघ्र पहचान और त्वरित उपचार अत्यंत आवश्यक है। कई गंभीर परिस्थितियों में पेरिटोनियल डायलिसिस अन्य जीवनरक्षक उपचारों के साथ अनिवार्य हो जाती है।
विशेषज्ञों ने दी केस आधारित जानकारी
कार्यक्रम के अंतर्गत महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, जयपुर के डॉ. यशु सैनी, डॉ. रूप शर्मा, डॉ. अजय गोयनका ने अपने-अपने विषयों पर व्याख्यान दिए और केस-आधारित चर्चा के माध्यम से बीमारियों के निदान और उपचार की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड आधारित पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मूल्यांकन पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ. रूप शर्मा ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों में त्वरित निर्णय लेने के लिए अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता का जीवंत और व्यावहारिक प्रदर्शन किया। वहीं, डॉ. अजय गोयनका ने दवा से नियंत्रित न होने वाली मिर्गी के मामलों में एपिलेप्सी सर्जरी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
विशेष अकादमिक सत्र का आयोजन
इस अवसर पर बीकानेर पीडियाट्रिक सोसाइटी और महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में विशेष अकादमिक सत्र भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. पी. सी. खत्री, डॉ. सी. के. चाहर, डॉ. महेश शर्मा एवं डॉ. रेणु अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।
Published on:
02 Feb 2026 09:12 pm
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
