
कार्यालय मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी
बूंदी. शिक्षा सत्र समाप्त होने में अब केवल दो माह शेष हैं, लेकिन जिले के सैकड़ों सरकारी स्कूल अब भी कंपोजिट ग्रांट के इंतजार में हैं। हालात इतने खराब है कि स्टेशनरी, सफाई सामग्री और बिजली-पानी के बिल तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मजबूरी में संस्था प्रधान अपनी जेब से खर्च उठा रहे हैं, जबकि सात माह बीत जाने के बावजूद शिक्षा विभाग अब तक अनुदान जारी नहीं कर सका है। अनुदान में हो रही देरी ने स्कूलों की रोजमर्रा से लेकर शिक्षण और खेल गतिविधियों तक को प्रभावित हो रही है। जानकारों के अनुसार शिक्षा सत्र शुरू हुए सात माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कंपोजिट स्कूल ग्रांट सहित अन्य आवश्यक अनुदान जारी नहीं किए गए हैं। इसका सीधा असर शिक्षण, खेल गतिविधियों और स्कूलों के दैनिक कार्यों पर पड़ रहा है। स्टेशनरी, सफाई सामग्री, चॉक-डस्टर, झाड़ू-पोछा, साबुन, पेयजल तथा बिजली-पानी के बिल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी स्कूल जूझ रहे हैं।
70 प्रतिशत राशि खर्च करना अनिवार्य
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के प्रावधानों के अनुसार सत्र के प्रारंभ में मिलने वाली कंपोजिट स्कूल ग्रांट की 70 प्रतिशत राशि दिसंबर तक खर्च करना अनिवार्य है। लेकिन राशि नहीं मिलने से स्कूलों में संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में संस्था प्रधान व शिक्षक उधार लेकर या शाला विकास कोष से राशि निकालकर काम चला रहे हैं।
जिले की स्थिति
जिले में कुल 1230 सरकारी स्कूल संचालित हैं। इनमें 575 प्राथमिक और 346 उच्च प्राथमिक हैं। कुल 921 स्कूलों में केवल 50 प्रतिशत ग्रांट ही आवंटित की गई है, जबकि 309 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों में अब तक एक भी राशि नहीं पहुंची है। जिन स्कूलों को 50 प्रतिशत ग्रांट मिली है, वह भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
ऐसे मिलती है कंपोजिट ग्रांट
कंपोजिट स्कूल ग्रांट नामांकन के आधार पर दी जाती है—
1 से 30 छात्र : 10 हजार रुपए
31 से 100 छात्र : 25 हजार रुपए
101 से 250 छात्र : 50 हजार रुपए
251 से 1000 छात्र : 75 हजार रुपए
1000 से अधिक छात्र : 1 लाख रुपए
इस राशि का उपयोग स्वच्छता, पेयजल, स्टेशनरी और शैक्षिक सामग्री पर किया जाता है।
जिले के 921 स्कूलों में 50 फीसदी ग्रांट आई है, जबकि 309 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों में अब तक राशि नहीं आई है। फरवरी के पहले सप्ताह में राशि आने की उम्मीद है। जैसे ही राशि आएगी, स्कूलों को भेज दी जाएगी।
दलीप सिंह गुर्जर, एडीपीसी, समग्र शिक्षा, बूंदी
Updated on:
31 Jan 2026 12:01 pm
Published on:
31 Jan 2026 12:00 pm
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