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Bundi: कनकसागर तालाब की तीस फीट पक्की पाळ व मंदिर परिसर के पीछे का गेट पानी में समाया

शहर के कनकसागर तालाब की क्षतिग्रस्त होती जा रही पाळ की सुध नही लिए जाने से गुरुवार रात को तीज के चबूतरे के पास की तीस फीट पाळ व पास ही स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के पीछे का दरवाजा व दीवार ढह कर तालाब में समा गई। पाळ का शेष हिस्सा भी किसी भी समय गिरने की स्थिति में है।

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कनकसागर तालाब की तीस फीट पक्की पाळ व मंदिर परिसर के पीछे का गेट पानी में समाया

नैनवां. तालाब में गुरुवार रात को गिरी कनकसागर की पाळ व मन्दिर परिसर के पीछे का हिस्सा।

नैनवां. शहर के कनकसागर तालाब की क्षतिग्रस्त होती जा रही पाळ की सुध नही लिए जाने से गुरुवार रात को तीज के चबूतरे के पास की तीस फीट पाळ व पास ही स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के पीछे का दरवाजा व दीवार ढह कर तालाब में समा गई। पाळ का शेष हिस्सा भी किसी भी समय गिरने की स्थिति में है। जिससे तालाब व मंदिर को खतरा हो गया।

22 अगस्त को एक ही दिन में बीस इंच बरसात होने से तालाब में पानी की जोरदार आवक होने से पाळ के ऊपर से ओवरफ्लो पानी निकलने से तीज के चबूतरे के पास पक्की पाळ क्षतिग्रस्त हो गई थी। पांच माह में भी क्षतिग्रस्त उसकी सुध नहीं लिए जाने से गुरुवार रात को पाळ का बड़ा हिस्सा व नीलकंठ महादेव मंदिर के पीछे वाला दरवाजा व दीवार एक साथ ढह गई।

सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगा रखा
तालाबों को संरक्षण प्रदान करने के नाम पर प्रशासन की और से नगरपालिका ने चेतावनी बोर्ड लगा रखा है कि जिस पर लिखा है कि तालाब की पाळ क्षतिग्रस्त है।

निर्देश दिए
उपखण्ड अधिकारी भागचंद रेगर ने बताया कि क्षतिग्रस्त हुई पाळ पर लोगों को खतरे से बचाने के लिए नगरपालिका को बेरिकेट््स लगाने के निर्देश दिए है।

रियासतकालीन धरोहर
15वीं शताब्दी में जब किलेदार नाहर खानङ्क्षसह ने नैनवां को टाउन प्लानर के हिसाब से बसाया था तो कस्बे के दोनों ओर निकलने वाले के पानी को सुरक्षा के लिए कस्बे के चारों और बनाए विशालकाय परकोटें को ही तालाब का रूप दिया गया था। नीलकंठ के पास टूटे हिस्से से मन्दिर परिसर को व द्वारिकाधीश के पास टूटे हिस्से से वहां बने कुंए के भी तालाब में समाने की स्थिति बनी हुई है। कनक सागर 318 बीघा 14 बिस्वा में स्थित है।