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Budget 2026 में हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स छूट की उम्मीद, बीमा उद्योग की बड़ी मांग

बजट 2026-27 में मेडिकल खर्च, हेल्थ इंश्योरेंस और रिटायरमेंट इनकम पर टैक्स राहत की मांग तेज हुई है। बीमा उद्योग का मानना है कि इससे मध्यम वर्ग और सीनियर सिटिजन्स को सीधा लाभ मिलेगा।

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भारत

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Thalaz Sharma

Jan 31, 2026

budget 2026 health insurance

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

Budget 2026 Health Insurance: देश में तेजी से बढ़ते मेडिकल खर्च पर टैक्स बोझ को लेकर बीमा उद्योग ने केंद्र सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद जताई है। हाल के सालों में हेल्थ केयर और बीमे के प्रीमियम में लगातार बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग और सीनियर सिटिजन्स पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में बजट 2026-27 में मेडिकल खर्च, ओपीडी केयर और पोस्ट रिटायरमेंट इनकम पर टैक्स छूट देने की मांग प्रमुख रूप से सामने आई है।

मेडिकल खर्च पर कितना बचा सकते हैं टैक्स?

बीमा उद्योग के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने की बजाय ओपीडी, डायग्नोस्टिक जांच और दवाओं पर भारत में परिवारों का सबसे बड़ा हेल्थ केयर खर्च होता है। विशेषज्ञों के अनुसार कुल घरेलू मेडिकल खर्च का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं में जाता है, लेकिन इन पर कोई सीधी टैक्स राहत नहीं मिलती। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बजट में ओपीडी और प्रिवेंटिव केयर के लिए अलग टैक्स डिडक्शन की व्यवस्था की जाती है, तो मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। अनुमान है कि सालाना करीब 45 हजार रुपये ओपीडी खर्च करने वाला परिवार टैक्स में 6 से 9 हजार रुपये तक की बचत कर सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस पर वर्तमान टैक्स नियम

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की भी मांग की जा रही है। वर्तमान में सेक्शन 80D के तहत 25 हजार रुपये तक की छूट मिलती है, जिसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का सुझाव है। बीमा विशेषज्ञों के मुताबिक 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आने वाले परिवारों के लिए इससे सालाना टैक्स बचत दोगुनी हो सकती है। सीनियर सिटिजन्स के मामले में यह राहत और भी ज्यादा प्रभावी होगी। बढ़ती मेडिकल महंगाई 11.5 से 14 प्रतिशत के बीच आंकी जा रही है, वह घरेलू बजट को कमजोर कर रही है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देना सरकार के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

रिटायरमेंट इनकम और जनरल इंश्योरेंस

बीमा उद्योग ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली एन्यूटी इनकम पर टैक्स व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई है। फिलहाल एन्यूटी इनकम पूरी तरह टैक्सेबल है, जिससे रिटायरमेंट प्लानिंग कम आकर्षक बनती है। टैक्स में समानता लाने से बुजुर्गों की मासिक आय में सुधार हो सकता है। वहीं जनरल इंश्योरेंस में सस्ते प्रोडक्ट्स पर स्टांप ड्यूटी और सर्विस चार्ज घटाने का सुझाव दिया गया है, ताकि ग्रामीण और पहली बार बीमा लेने वाले लोगों को जोड़ा जा सके। अस्पताल के कमरे के किराये पर जीएसटी हटाने और माइक्रो इंश्योरेंस को प्रोत्साहन देने से भी आम लोगों का खर्च कम हो सकता है।