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पांढुर्ना जिला और एसआइआर के पेंच से घट गई मतदाताओं की संख्या

जनसंख्या में वृद्धि के अनुपात में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी भी बहुत बड़ी संख्या में मतदाता, नाम काटने और स्थानांतरण होने के चलते फंसे हुए हैं।

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Rajasthan Panchayat Election

Photo: AI generated

पांढुर्ना जिला अलग नहीं होता और एसआइआर का पेंच न आया होता तो निश्चित ही छिंदवाड़ा के मतदाताओं की संख्या इस समय करीब 16.50 लाख हो रही होती। ऐसा इसलिए कि जनसंख्या में वृद्धि के अनुपात में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी भी बहुत बड़ी संख्या में मतदाता, नाम काटने और स्थानांतरण होने के चलते फंसे हुए हैं। राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को लोकतंत्र के उत्सव मेंं मतदाताओं की भूमिका को एक बार फिर याद करना होगा।


आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए पहले आम चुनाव में जब हमारे बुजुर्ग वोट डालने मतदान केन्द्रों पर गए थे, तब उनकी केवल 3.51 लाख थी। 74 साल बाद आज जब हमारी पीढ़ी 2026 में एसआइआर की सूची में अपना नाम देख रही है तो हम मतदाताओं की ंसंख्या 11.67 लाख है। इससे दो वर्ष पहले जब पांढुर्ना जिला हमारे साथ था तो हम मतदाताओं की संख्या 16.32 लाख थी। फिर एसआइआर यानि विशेष मतदाता पुनरीक्षण के बाद हमारी संख्या कम हो गई है।


एक दशक में बढ़ी आबादी, मतदाता संख्या में फेरबदल


जनसांख्यिकी आंकड़े देखा जाए तो वर्ष 2011 की जनगणना में आबादी 20.90 लाख थी। 15 साल के बाद इसे सरकारी स्तर पर छिंदवाड़ा जिले की आबादी 23.74 लाख अनुमानित मान लिया लिया गया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के समय मतदाता संख्या 14.07 लाख थी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में 16.32 लाख हो गई थी।


स्त्री-पुुरुष अनुपात भी सुधरा, मतदान प्रतिशत भी 91 तक


पिछले दो दशक में मतदाताओं में स्त्री-पुरुष अनुपात में सुधार हुआ है। वर्तमान में जिले का जेंडर रेशो 980 है। इनमें छिंदवाड़ा विधानसभा में 1007 है। इसी तरह मतदान प्रतिशत भी 91 प्रतिशत तक दर्ज हुआ है। यह भी लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को चुनने की ताकत दर्शाता है।


मतदान में युवाओं की हिस्सेदारी, 85 साल के बुजुर्ग भी


जिले के मतदाताओं में 18 वर्ष से 30 साल के युवा वर्ग की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है। पिछला रिकार्ड बताता है कि 85 साल से अधिक बुजुर्ग 7747 थे। मतदाताओं की यह भी खूबी है कि वे वोट देने का निर्णय सोच समझकर करते हैं।


एक दशक में मतदाताओं की संख्या


वर्ष मतदाता
2013 1361914
2014 1407934
2015 1417161
2016 1432039
2017 1452812
2018 1465517
2019 1512369
2020 1506094
2022 1553420
2023 1619101
2024 1632896
2025 1226602
2026 1167234
नोट-छिंदवाड़ा जिले से पांढुर्ना जिले की दो विधानसभा सौंसर-पांढ़ुर्ना को अलग कर दिया गया है।


इनका कहना है….

लोकतंत्र के उत्सव में आम नागरिकों की हिस्सेदारी है तो वहीं प्रशासन की जिम्मेदारी मतदाता सूची की शुद्धता को बरकरार रखना है। एसआइआर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम संशोधित किए गए है। इसे जोडऩे का काम भी शुरू हो गया है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस लोकतंत्र में हमारी भागीदारी का उत्सव है।
-धीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर।