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दौसा में कांग्रेस विधायक-पटवारी के बीच हुई तीखी नोकझोंक, ऑडियो वायरल

दौसा में लैंड कन्वर्जन को लेकर पटवारी और विधायक के बीच हुई तीखी नोकझोंक का ऑडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसको लेकर लोग तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं।

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दौसा

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Kamal Mishra

Feb 05, 2026

Dausa viral

सांकेतिक तस्वीर (फोटो-पत्रिका)

दौसा। जिले में भूमि रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन) के विवाद को लेकर कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा और महिला पटवारी हेमलता मीणा के बीच हुई तीखी बहस का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस बातचीत में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े नजर आ रहे हैं। मामला दौसा तहसील के खसरा नंबर 171/1 से जुड़ा है, जहां करीब दो महीने पहले प्लॉटिंग की गई थी।

ऑडियो में पटवारी हेमलता मीणा स्पष्ट रूप से कहती हैं कि यदि विधायक को आपत्ति है तो वे उनका तबादला करवा सकते हैं, क्योंकि यह उनके अधिकार में है। वहीं विधायक का कहना है कि अधिकारी गरीब लोगों को बेवजह परेशान कर रहे हैं।

विधायक का आरोप

वायरल ऑडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक दीनदयाल बैरवा ने कहा कि उन्हें यह याद नहीं कि यह बातचीत कब हुई थी, लेकिन प्रशासन लंबे समय से वहां रह रहे गरीब परिवारों को यूआईटी (Urban Improvement Trust) में कन्वर्जन न होने का हवाला देकर उजाड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और वे मनमानी कर रहे हैं, जिसका वे पुरजोर विरोध करेंगे।

विधायक-पटवारी के बीच पूरी बातचीत

पटवारी: आप मुझे धमकी कैसे दे रहे हैं? मैं अपना काम कर रही हूं।

विधायक: आप क्या काम कर रही हो?

पटवारी: यूआईटी की जमीन पर बिना कन्वर्जन के प्लॉटिंग हो रही है, तो मैं गलत काम में सहयोग नहीं करूंगी।

विधायक: यहां लोग तो पहले से बसे हुए हैं, यूआईटी बाद में आई है।

विधायक: मैंने ट्रांसफर की बात तो कही ही नहीं, फिर आप ऐसी बातें क्यों कर रही हो?

पटवारी: मैं नौकरी करने आई हूं और आप मुझे धमकी दे रहे हैं।

विधायक: गरीब लोगों को परेशान मत करो।

पटवारी: बताइए, स्कीम काटने वाला कौन सा गरीब है?

विधायक: मैं मकान बनाने वालों की बात कर रहा हूं, स्कीम वालों की नहीं।

पटवारी: मैं स्कीम काटने वालों की बात कर रही हूं, मकान वालों की नहीं। मैं खसरा 173/1 की बात कर रही हूं, जहां स्कीम काटी गई है।

विधायक: मैंने कोई स्कीम नहीं काटी, मेरे जानने वाले होंगे।

पटवारी: अगर आपके इतने जानने वाले हैं तो यूआईटी से कन्वर्जन करवा कर स्कीम काटिए।

विधायक: हां, ऐसे ही बात कीजिए।

पटवारी: यूआईटी की जमीन पर मैं मकान बिल्कुल नहीं बनने दूंगी। कन्वर्जन कराकर आप महल बना लें, मुझे आपत्ति नहीं है।

विधायक: ठीक है।

तहसीलदार के निलंबन की मांग तेज

इससे पहले सोमवार को विधायक बैरवा और तहसीलदार गजानंद मीणा के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो भी सामने आया था। इसे लेकर विधायक गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से मिले और विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया।

विधायक ने आरोप लगाया कि तहसीलदार न तो कानून का पालन करते हैं और न ही जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी खुद को दौसा की जमीनों का मालिक बताते हैं और उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने तहसीलदार को तुरंत निलंबित या बर्खास्त करने की मांग की।

जेसीबी से मकान तोड़ने का आरोप

विधायक ने सदन में बताया कि प्रशासन ने दो जेसीबी मशीनों से गरीबों के मकान तोड़े, जबकि महिलाएं और बच्चे रो रहे थे। उन्होंने कहा कि जब वे मौके पर पहुंचे तो तहसीलदार ने उनसे अभद्र व्यवहार किया और खुद को जमीन का मालिक बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि होदायली गांव में बिना नोटिस पांच गरीब परिवारों के घर गिरा दिए गए और एक दो साल के बच्चे को कमरे में बंद कर दिया गया, जो बेहद अमानवीय है।

यूआईटी पर भी सवाल

विधायक ने यूआईटी पर निशाना साधते हुए कहा कि संस्था कागजों में बनी है, लेकिन जमीन पर कोई काम नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मनमर्जी से कार्रवाई करते हैं और भू-माफियाओं से मिलीभगत रखते हैं।