
- आमजन में उबाल, खाकी की कहानी पर संदेह- पुलिस कस्टडी में पकड़े ठगी के आरोपित से रजिस्ट्री करवाने का मामला
- सीओ को सौंपी जांच, कई और भी संदेह के घेरे में
dholpur. दिहोली थाने की कार्यप्रणाली ने पुलिसिंग पर सवाल खड़े कर दिए। आमजन के जेहन में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या थाने से सिर्फ एक कांस्टेबल की इतनी हिम्मत हो सकती है कि वह बेहद संवेदनशील मामले के आरोपी को कस्टडी के बीच जमानत की कह कर ले पंजीयन कार्यालय ले जाए और उसकी दो करोड़ 70 लाख बुक वेल्यू की संपत्तियों की रजिस्ट्री जबरन अन्य लोगों के नाम करवा दे। उक्त प्रकरण को लेकर पत्रिका ने 25 जनवरी के अंक में ‘पुलिस बनी वसूली एजेंट, कस्टडी में ही करवा दी रजिस्ट्री’ की खबर प्रकाशित होने पर महकमे में हडक़ंप मच गया। उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने पर रविवार देर शाम पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने दिहौली थाना प्रभारी छवि फौजदार को पुलिस लाइन कर दिया। प्रकरण में एक कांस्टेबल को पहले ही निलम्बित किया जा चुका है। प्रकरण की संवेदनशीलता को लेकर जांच मनियां सीओ से लेकर सीओ एसटीएससी सेल को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार इस घटनाक्रम में थाने के एक-दो और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। जिसको लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी अलग से ठगी के आरोपित की संपत्तियों की जांच कर रहे हैं।
वहीं, गंभीर मामला यह है कि इस प्रकरण में जो रजिस्ट्री 8 लोगोंं के नाम की गई है उनके साथ कुल 13 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर मामले की लीपापोती करने का प्रयास किया गया है। वहीं, सवाल उठ रहा है कि पंजीयन कार्यालय आरोपित को लेकर गए तो यह तो साफ है कि तैयारी पहले से ही थी। रजिस्ट्री जाते ही नहीं हो जाती, समय लगता है। लेकिन इस दौरान थाना प्रभारी को सूचना तक नहीं मिली जबकि पुलिस तंत्र तो मुखबिरी पर पर ही टिका है।
हिरासत से हो गई रजिस्ट्री!
दिहोली थाना पुलिस ने नौकरी के नाम पर ठगी के एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया था। जिसपर 25 मुकद्दमे विभिन्न थानों में दर्ज हैं, जबकि 100 से अधिक लोगों को ठगने का अंदेशा है। ठगी की राशि भी 40 करोड़ के आसपास आकी जा रही है, वहीं पुलिस के अनुसार भी यह राशि 6 से 8 करोड़ हो सकती है। थाना के कुछ पुलिस कर्मियों ने कुछ बड़े पीडि़तों से उनकी राशि की वसूली करवाने का ठेका ले लिया और इसके लिए पूरी प्लानिंग के तहत हिरासत में आए आरोपी को धमका कर संपत्ति की रजिस्ट्री कुछ पीडि़तों के नाम करने का दबाव बनाया गया। कस्टडी में ही आरोपी से रजिस्ट्री कराने को लेकर सारी तैयारियां भी पूरी कारवाई गई और पुलिस कर्मी सीधे उसे पंजीयन कार्यालय ले गए जहां से उसकी कीमती संपत्ति को कुछ खास पीडि़तों के नाम पंजीकरण करवा दिया गया।
क्या केवल एक आरोपी!
पुलिस थाने ने पहले तो अपने स्तर पर ही मामले को सुझलाने का प्रयास किया। लेकिन पीडि़तों को न्याय नहीं मिलता देख वह जिला पुलिस अधीक्षक से मिले। जिस पर मामला गंभीर हो गया और एसपी ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपित पुलिस कांस्टेबल महाराज सिंह को निलम्बित कर दिया। जबकि लोगों का मानना है कि षड्यंत्र में एक व्यक्ति शामिल होना मुश्किल है, बल्कि इसमें कई और खिलाड़ी भी हैं, जिन्हें बचाया जा रहा है। मामला करोड़ों रुपए की ठगी से जुड़ा होने के बावजूद थाने के जिम्मेदारों के रवैये को लेकर संदेह बना हुआ है। हालांकि, जांच में अब और परते खुलने की उम्मीद बनी हुई है। एसपी के सीआई छवि फौजदार को लाइन भेजने के बाद हडक़ंप मचा हुआ है।
22 की घटना और 23 को पीडि़त से करवाई प्राथमिकी
यह घटना 22 जनवरी को घटित हुई, लेकिन मामला खुला तो 23 को पीडि़त से आरोपी कॉन्स्टेबल और एक दर्जन अन्य जिनमें एक अन्य कॉन्स्टेबल व एक सरकारी अध्यापक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें पीडि़त ने लिखा है कि आरोपी कॉन्स्टेबल महाराज सिंह उसे जमानत की कहकर थाने से ले गया था कि जमानत के बाद थाना वापस छोड़ दूंगा। थाने के बाहर एक निजी गाड़ी में जितेंद्र कॉन्स्टेबल एक सरकारी अध्यापक राजाखेड़ा ले गए और रहना वाली मोड़ पर रोक लिया और कहा कि पटवारी आ रहा है। उसके बाद जमानत के बाद जबरन तहसील ले गए, जहां बिना 2 करोड़ 70 लाख की राशि दिए और न ही चेक लौटा, जबरन रजिस्ट्री करवा ली गई। उसने महाराज सिंह, मनोज पोषवाल, हरिराम, जनवेद कुसेंड, जनवेद ओछा का पुरा, वीरेंद्र, कुलदीप, मुकेश, लज्जाराम, जरडोदान, कल्ली, यतेंद्र, जितेंद्र को नामजद किया है।
घटनाक्रम की तिथि पर वह कोर्ट में थी, आरोपी कॉन्स्टेबल को आरोपी को अकेले नहीं के जाना चाहिए था। उसने उच्च अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन किया है। प्रकरण की जांच उच्च स्तर पर लंबित है जिसके पूरी होने के बाद शेष कार्रवाई की जाएगी।
-छवि फौजदार, सीआई (कार्रवाई से पहले बताया)
यह एक गंभीर मामला है। पुलिस हिरासत में अगर कोई अपराध होता है तो पूरा थाना ही जिम्मेदार होता है। मामला सिर्फ उन पीडि़तों पर दर्ज किया गया जिन्होंने अपनी ही रकम आरोपी से वसूली है । वह भी पुलिस के आदमी की मध्यस्थता में। पीडि़तों पर मुकद्दमा निरस्त हो और पुलिस कर्मियों पर दर्ज किया जाना चाहिए।
-वीरेंद्र जादौन, निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष राजाखेड़ा
आरोप बेहद संवेदनशील है। प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होकर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई भी आवश्यक है, जिससे आगे भी सबक मिल सके।
-रामवीर शर्मा, मरेना वरिष्ठ भाजपा नेता
पुलिस वर्दी इस तरह कार्य कर रही है, जैसे निजी बैंकों के रिकवरी एजेंट हैं, लेकिन ये तो तनख्वाह सरकार से लेकर भी आमजन का शोषण कर अपराधियों का सहयोग कर रहे हैं।-लक्ष्मीकांत गुप्ता, व्यापारी नेता- नियम कानून सबके लिए बराबर हैं। आमजन हो या पुलिस अधिकारी। इस गड़बड़झाले में पूरा थाना ही प्रथम दृष्ट्या जिम्मेदार है।
-उपेंद्र गोस्वामी, व्यापारी
Published on:
26 Jan 2026 05:01 pm
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