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बजट में पर्याप्त फंड नहीं मिलने से धौलपुर-गंगापुरसिटी परियोजना अधर में

-क्षेत्रीय लोगों को आने वाले बजट से उम्मीदें, जिससे लगें परियोजना को पंख -धौलपुर से सरमथुरा तक आमान परिवर्तन का कार्य व जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया अधूरी dholpur.धौलपुर से गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना गत 15 वर्ष से महज रेंग रही है। हर साल के बजट में लोग अपनी रेल की उम्मीद संजोए रहते हैं, लेकिन […]

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बजट में पर्याप्त फंड नहीं मिलने से धौलपुर-गंगापुरसिटी परियोजना अधर में Dholpur-Gangapur City project in limbo due to lack of adequate funds in the budget

-क्षेत्रीय लोगों को आने वाले बजट से उम्मीदें, जिससे लगें परियोजना को पंख

-धौलपुर से सरमथुरा तक आमान परिवर्तन का कार्य व जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया अधूरी

dholpur.धौलपुर से गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना गत 15 वर्ष से महज रेंग रही है। हर साल के बजट में लोग अपनी रेल की उम्मीद संजोए रहते हैं, लेकिन अभी तक लोगों को उनकी उम्मीदों का फल नहीं मिल सका। हालात यह हैं कि परियोजना महज खानापूर्ति तक ही सीमित होकर रह गई है और सरमथुरा, करौली के लोग दशकों से रेल की पटरी बिछने की आस लगाए हुए हैं, लेकिन 15 वर्ष पहले के बजट में स्वीकृति के बाद भी परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी।

वित्तीय वर्ष 2010-11 के बजट में दो चरणों में स्वीकृत इस परियोजना का अभी पहले फेज का काम भी अधूरा है। उत्तर मध्य रेलवे ने प्रथम चरण में धौलपुर से सरमथुरा तक आमान परिवर्तन का प्रोसेस में चल रहा है, लेकिन कार्य अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है, हालांकि आमान परिवर्तन का काम 2024 तक पूरा किया जाना था। ऐसे में पहले तो प्रथम चरण का कार्य पूरा होना है, इसके बाद दूसरे चरण के काम के लिए रेलवे बोर्ड के पास लंबित संशोधित तकमीना के बजट की स्वीकृति मिलनी है। तब जाकर करौली को रेल लाइन से जोड़े जाने वाले दूसरे चरण के काम की शुरुआत के आसार बनेंगे। क्षेत्रीय लोगों को आने वाले बजट से उम्मीदें, जिससे लगें परियोजना को पंख लग सकें।

इस साल के बजट में इस परियोजना के लिए पूरी राशि दी जाती तो परियोजना को पंख लग सकते हैं। नहीं तो परियोजन यंू ही रेंगती रहेगी, हालांकि रेल परियोजना को गति देने के लिए बजट की दरकार है। इस बार के बजट को लेकर धौलपुर-करौली इलाके के लोग फिर उम्मीद लगाए हैं कि क्या इस बार के बजट में परियोजना को पर्याप्त बजट मिल सकेगा, जिससे यह परियोजना वापस पटरी पर आ पाए।

यूपीए सरकार में परियोजना को मिली थी स्वीकृति

दशकों से की जा रही मांग पर यूपीए सरकार ने धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल लाइन परियोजना को 2010-2011 के बजट में स्वीकृत किया था। इससे इलाके के निवासियों को रेल का सपना पूरा होने की उम्मीद जगी थी। 2012-13 में इसके सर्वे का काम हुआ। इतना ही नहीं वर्ष 2013 में सरमथुरा में तत्कालीन केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री गहलोत ने इस रेल परियोजना का शिलान्यास तक कर दिया था। राजग सरकार में कई साल लंबित रहने के बाद परियोजना पर काम शुरू हुआ, लेकिन प्रदेश में भाजपा शासन काल में सरमथुरा से धौलपुर की छोटी लाइन को हैरिटेज के रूप में संरक्षित किए जाने के प्रदेश सरकार की अभिंशसा पर परियोजना के काम को फ्रीज कर दिया गया। परियोजना पर करीब 70 करोड़ रुपए से अधिक खर्च भी हो चुके थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्ता में आने पर रेल मंत्रालय को फ्रीज कार्य को शुरू कराने को पत्र लिखे। इसके बाद परियोजना के प्रथम चरण का काम शुरू हुआ वहीं भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है।

ट्रांसपोर्टेशन की सीधी कनेक्टिविटी से पत्थर व्यवसाय में लगेंगे पंख

गंगापुरसिटी को वाया करौली होते हुए सीधा सरमथुरा को रेल लाइन से जोडऩे पर पत्थर व्यवसाय को पंख लगने की संभावना है। गैंगसा उद्यमी सतीश गर्ग ने बताया कि रेल परियोजना शुरू होने से ट्रांसपोर्टेशन की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगेगी। जिससे पत्थर व्यापार सुलभ हो सकेगा साथ ही हर दृष्टि से ये फायदे वाली परियोजना है। फिर भी इसकी लगातार अनदेखी हो रही है। करौली-धौलपुर रेल लाइन निकलने से पश्चिम से नया कॉरीडोर भी खुल सकेगा। इसके अलावा दक्षिण भारत के शहरों की यात्रा दूरी कम होगी जिससे दिल्ली, जयपुर जैसे शहरों के स्टेशनों से रेल यातायात के दबाव में कमी आएगी। इतने लाभ होने पर भी इस परियोजना की अनदेखी हैरत भरी है।