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Sainik School: 65 साल में पहली बार सैनिक स्कूल की कमान महिला अधिकारी के हाथों में, जानें कौन हैं कर्नल सीमा मिश्रा

कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सैनिक स्कूल की स्थापना वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद ने की थी। यह संस्थान देश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में गिना जाता है।

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भारत

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Anurag Animesh

Feb 10, 2026

Colonel Seema Mishra

Colonel Seema Mishra

Who Is Colonel Seema Mishra: लखनऊ के प्रतिष्ठित कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सैनिक स्कूल में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। स्कूल की कमान अब कर्नल सीमा मिश्रा के हाथों में है। उनकी नियुक्ति के साथ ही एक नया अध्याय शुरू हो गया है, क्योंकि वह किसी सैनिक स्कूल की प्रिंसिपल बनने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं। करीब 65 साल पुराने इस संस्थान में जनवरी 2021 से कर्नल राजेश राघव प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत थे। अब उनकी जगह कर्नल मिश्रा ने जिम्मेदारी संभाली है। कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने सबसे पहले स्कूल परिसर में बने युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद ऑडिटोरियम में कैडेट्स और स्टाफ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा और अनुशासन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

Colonel Seema Mishra: कौन हैं कर्नल सीमा मिश्रा?


कर्नल सीमा मिश्रा की नियुक्ति दो साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर की गई है। उन्होंने साल 2003 में आर्मी एजुकेशन कोर में कमीशन प्राप्त किया था। सेना में उनको 22 साल का लंबा अनुभव है। इससे पहले वह राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल बेलगाम में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वह सैनिक स्कूल कपूरथला में वाइस प्रिंसिपल भी रह चुकी हैं।

कई सम्मान से हो चुकी है सम्मानित


कर्नल सीमा मिश्रा भारतीय सैन्य अकादमी में इंस्ट्रक्टर के रूप में तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी रही हैं। उनकी सेवाओं और समर्पण को देखते हुए उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

Sainik School: जानें स्कूल का इतिहास

कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सैनिक स्कूल की स्थापना वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद ने की थी। यह संस्थान देश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में गिना जाता है। यहां से निकले कई छात्र सेना और अन्य सेवाओं में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे हैं। साल 2018 में यह स्कूल एक और वजह से चर्चा में आया था। यह देश का पहला सैनिक स्कूल बना जिसने लड़कियों को कैडेट के रूप में प्रवेश दिया। पहले बैच में 15 छात्राओं ने दाखिला लिया था। उस समय भी यह कदम ऐतिहासिक माना गया था।