
History Of Budget
First Budget Of Independent India: देश की नजरें एक बार फिर आम बजट पर टिकने वाली हैं। 1 फरवरी, रविवार को केंद्र सरकार यूनियन बजट पेश करने जा रही है। इस बार बजट इसलिए भी खास है, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे लगातार नौवीं बार संसद में पेश करेंगी। किसी एक प्रधानमंत्री के कार्यकाल में इतने ज्यादा बजट पेश करने वाली वह देश की इकलौती वित्त मंत्री बन चुकी हैं। लेकिन बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का नाम नहीं है। इसके पीछे एक लंबा इतिहास, कई रोचक किस्से और परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। आइये जानते हैं इससे जुड़े कुछ जरुरी तथ्य और इसका इतिहास।
भारत में बजट की शुरुआत आजादी से पहले ही हो चुकी थी। ब्रिटिश शासन के दौरान 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने देश का पहला बजट पेश किया था। वहीं आजाद भारत का पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को संसद में रखा गया था। उस ऐतिहासिक बजट को आर. के. षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था।
अगर रिकॉर्ड की बात करें, तो यह रिकॉर्ड आज भी कोई नहीं तोड़ पाया है। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए कुल 10 बजट पेश किए थे। 1959 से 1964 के बीच उन्होंने छह बजट दिए, जबकि 1967 से 1969 के बीच चार बार बजट भाषण दिया।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी बजट इतिहास में अहम स्थान रखते हैं। वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने कुल आठ बजट पेश किए। शुरुआती तीन बजट 1982 से 1984 के बीच आए, जबकि 2009 से 2012 तक यूपीए सरकार में उन्होंने लगातार पांच बजट संसद में रखे। वहीं निर्मला सीतारमण 2019 से देश की पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं। अब तक वह एक अंतरिम बजट समेत आठ बजट पेश कर चुकी हैं। बजट 2026 उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो अपने आप में एक नया अध्याय जोड़ देगा।
हर बजट से पहले एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘हलवा सेरेमनी’ कहा जाता है। बजट डाक्यूमेंट्स की छपाई शुरू होने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है और अधिकारियों को बांटा जाता है। इसके बाद बजट से जुड़े सभी अधिकारी ‘लॉक-इन पीरियड’ में चले जाते हैं। इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह बंद रहता है, ताकि बजट की कोई जानकारी बाहर न जाए।
Published on:
31 Jan 2026 04:53 pm
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