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गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़…एक चूक पर पकड़ में आया मामला

गाजियाबाद जिले में पुलिस और पासपोर्ट विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर पर 25 पासपोर्ट बनने का मामला सामने आया है.

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Up news, fake passport

फोटो सोर्स: सोशल इमेज, फर्जी पासपोर्ट का भंडाफोड़

गाजियाबाद में पुलिस ने एक गिरोह का खुलासा किया है जो नकली पते और डॉक्यूमेंट के आधार पर अवैध रूप से पासपोर्ट बनाने का काम कर रहा था। इस मामले में एक डाकिये सहित पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

एक ही पते पर जारी हुए थे कई पासपोर्ट

पुलिस उपायुक्त (ग्रामीण क्षेत्र) सुरेंद्रनाथ तिवारी ने रविवार को जानकारी दी कि यह मामला तब उजागर हुआ जब पिछले साल दिसंबर में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने पुलिस को संदिग्ध आवेदनों के बारे में एक पत्र लिखा। इन आवेदनों में एक ही पते पर कई पासपोर्ट जारी किए गए थे और एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग किया गया था।

हर पासपोर्ट को गिरोह तक पहुंचाने का दो हजार लेता था पोस्टमैन

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आवेदक उन पतों पर निवास नहीं करते थे, जो पासपोर्ट आवेदनों में दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक डाकिये और एक महिला समेत 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अब तक डाकिये अरुण कुमार सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।अरुण कुमार इस गिरोह का सहयोगी था और उसने दस्तावेजों को निर्दिष्ट पतों पर पहुंचाने के बजाय सीधे गिरोह के सदस्यों को देने के लिए प्रति पासपोर्ट दो हजार रुपये की मांग की।

इंटेलिजेंस भी जांच में जुटी, खंगाल रही है नेटवर्क

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान अरुण कुमार ने खुलासा किया कि लगभग पांच महीने पहले प्रकाश सुब्बा और विवेक नामक दो व्यक्तियों ने उससे संपर्क किया था।

उन्होंने कहा कि यदि वह उन्हें पासपोर्ट सौंपने के लिए सहमत होता है, तो उसे हर पासपोर्ट के लिए दो हजार रुपये मिलेंगे। तिवारी ने बताया कि खुफिया एजेंसियां इस रैकेट के पीछे के बड़े नेटवर्क की जांच कर रही हैं। पुलिस ने आगे की जांच जारी रखी है।

प्रारंभिक जांच में पांच गांवों से जुड़े बीपीओ की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बिना मौके पर गए, बिना आवेदकों की पहचान पुख्ता किए, सत्यापन रिपोर्ट पास कर दी गई। इतना ही नहीं, स्थानीय खुफिया इकाई यानी एलआइयू भी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी रही।