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सवर्ण आर्मी प्रमुख बोले- UGC कानून के जरिए समाज को बांटने की कोशिश, आंदोलन तब तक चलेगा जब तक BJP चली ना जाए

यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण आर्मी सहित विभिन्न संगठनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। सवर्ण आर्मी प्रमुख ने UGC के नए प्रावधान को काला कानून घोषित कर दिया।

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सर्वेश पांडे फोटो सोर्स पत्रिका

सर्वेश पांडे फोटो सोर्स पत्रिका

गोंडा जिले में UGC के नए प्रावधानों को लेकर जिले में विरोध तेज हो गया है। सवर्ण आर्मी के नेतृत्व में विभिन्न जन संगठनों और सैकड़ों छात्रों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने UGC को वापस लेने की मांग करते हुए डीएम को ज्ञापन सौंपा।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में UGC के नए कानून को लेकर लगातार विरोध देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में बुधवार को सवर्ण आर्मी के साथ जिले के कई जन संगठनों और सैकड़ों छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सभी प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान “UGC रोल बैक करो”, “UGC वापस लो” जैसे नारे लगाए गए।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। सवर्ण आर्मी के संस्थापक व अध्यक्ष सर्वेश पांडेय के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन को ज्ञापन सौंपकर UGC के नए प्रावधानों को तुरंत वापस लेने की मांग की।

UGC के नए कानून में सवर्ण समाज के बच्चों को पहले से ही शोषक घोषित कर दिया

सवर्ण आर्मी प्रमुख सर्वेश पांडेय ने कहा कि नए UGC कानून में सवर्ण समाज के बच्चों को पहले से ही शोषक मान लिया गया है। जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए सरकार ने समाज को दो हिस्सों में बांटने का काम किया है। एक शोषित और दूसरा शोषक। जब एससी, एसटी और ओबीसी को शोषित वर्ग में रखा गया है। तो सवाल उठता है कि शोषक कौन है।

हम जाति के आधार पर ना भेदभाव करते, ना इसे स्वीकार करेंगे

उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के तहत सवर्ण समाज के छात्रों को मानसिक रूप से अपराधी जैसा महसूस कराया जा रहा है। जिससे छात्रों में भय का माहौल बन गया है। सवर्ण आर्मी ने स्पष्ट किया कि वे जाति के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव के खिलाफ हैं। और इसे स्वीकार नहीं करेंगे। सर्वेश पांडेय ने कहा कि जब तक यह “काला कानून” वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों और समाज में समानता बनाए रखने के लिए UGC के इन प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।