
जेयू रैगिंग केस में 8 सीनियर छात्र दोषी, आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा से वंचित, चेतावनी पत्र जारी
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में रैगिंग और प्रताडऩा के मामले में प्रशासन ने पहली बार सख्ती दिखाते हुए आठ सीनियर छात्रों को दोषी ठहराया है। बीफार्मेसी फस्र्ट ईयर के दो छात्रों द्वारा यूजीसी की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर की गई शिकायत की जांच के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने दोष सिद्ध माना है। यूजीसी से पत्र मिलने के बाद कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य ने तत्काल जांच समिति गठित कर मामले की जिम्मेदारी प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सौंपी थी। बोर्ड ने जांच के दौरान पीडि़त दोनों जूनियर छात्रों और मारपीट व प्रताडऩा के आरोपी आठ सीनियर छात्रों के कथन दर्ज किए।
रिपोर्ट कुलगुरु को सौंपी, कार्रवाई तय
जांच पूरी होने के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कुलगुरु को सौंप दी, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठों दोषी छात्रों को एक-एक आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा से वंचित कर दिया है। इसके साथ ही सभी को चेतावनी पत्र भी जारी किया गया है।
यूजीसी की शिकायत ने खोली आंखें
यह मामला तब सामने आया जब पीडि़त छात्रों ने विश्वविद्यालय स्तर पर समाधान न मिलने पर सीधे यूजीसी में शिकायत की। यूजीसी के हस्तक्षेप के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया, जिससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या बिना यूजीसी दबाव के कार्रवाई संभव नहीं थी।
रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस के दावे फिर सवालों में
विश्वविद्यालय प्रशासन रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस का दावा करता है, लेकिन कार्रवाई केवल आंतरिक मूल्यांकन तक सीमित रखने पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि यदि दोबारा ऐसी घटना होती है तो और कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
Updated on:
02 Feb 2026 06:04 pm
Published on:
02 Feb 2026 06:03 pm
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