8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP में श्रेय लूटने के लिए सीएम से कराया अधूरे ISBT का उद्घाटन, अबतक मेन गेट भी नहीं बना

MP News: 77 करोड़ की लागत से बना आईएसबीटी राजनीतिक जल्दबाजी की भेंट चढ़ गया। उद्घाटन के सात महीने बाद भी न बसें चलीं, न निर्माण पूरा हुआ।

2 min read
Google source verification
Gwalior ISBT construction incomplete after 7 months of inauguration by cm mohan yadav mp news

Gwalior ISBT construction incomplete after 7 months of inauguration (फोटो- गूगल फोटो)

MP News: स्मार्ट सिटी के अफसरों ने जल्दबाजी दिखाते हुए आधी-अधूरी तैयारी की बीच सात महीने पहले मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री से ग्वालियर आईएसबीटी (Gwalior ISBT) का शुभारंभ तो करा दिया। इस दौरान पब्लिक से वादा किया कि जल्द ही यहां से बसे चलेगी, खैर बसे चलाने की कवायद भी की गई, लेकिन यूनियन व अफसरों के लापरवाही से ठंडे बस्ते में चली गई। आज स्थिति यह है कि आईएसबीटी में सात महीने बाद भी बस नहीं चल सकी। मुख्य द्वार, दुकानों का निर्माण कार्य, आईएसबीटी में सड़क सहित अन्य कार्य आज भी आधे अधूरे पड़े हुए हैं। करोड़ों की लागत से बनी इमारत आज भी खाली पड़ी है और पूरा प्रोजेक्ट कागजों में सिमटकर रह गया है।

7 महीने पहले सीएम और केंद्रीय मंत्री ने किया था उद्घाटन

5 जुलाई 2025 को आईएसबीटी का उद्घाटन हुआ था। लेकिन उ‌द्घाटन के सात महीने बाद भी आईएसबीटी से बसे चलाने का पूरा प्लान कागजों में ही दफन है। न रूट तय हुए, न संचालन की ठोस व्यवस्था की गई न ही यात्रियों के लिए कोई सुविधा शुरू हो सकी। बस यूनियन के आगे प्रशासन और आरटीओ पूरी तरह बोने साबित हुए। यूनियन के दबाव के आगे नीतिगत फैसले ठंडे बस्ते में चले गए। रोडवेज बस स्टैंड से आईएसबीटी तक बसें शिफ्ट करने की योजना सिर्फ फाइलों में घूमती रही। बता दें कि मैसर्स प्रेग्मेटिक फर्म द्वारा 77 करोड़ रुपए में आईएसबीटी को तैयार किया गया है और इसके संघारन और मरम्मत का कार्य भी 8 करोड़ में लिया है।

पत्रिका व्यू…जवाबदेही किसकी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संचालन की तैयारी ही नहीं थी, तो शुभारंभ क्यों कराया गया। क्या यह उद्घाटन सिर्फ फोटो सेशन और राजनीतिक श्रेय लेने तक सीमित था। ठेका मैसर्स प्रेग्मेटिक इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म द्वारा 77 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी अगर आईएसबीटी शोपीस बना रहे, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा। आज हालात यह है कि यात्री पुराने बस स्टैंड की अव्यवस्था झेलने को मजबूर हैं, जबकि नया आईएसबीटी प्रशासनिक लापरवाही और निर्णयहीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

ये है अभी हालात…

आईएसबीटी में जगह-जगह गंदगी के ढेर लग हुए हैं, मुख्य द्वार के साथ सड़क भी बनकर तैयार नहीं हुई है, दूसरी ओर का गेट व सड़क भी नहीं बनी है, बाउंड्रीवॉल भी नहीं तोड़ी गई है। दुकानों के रंगाई-पुताई के साथ अभी पैवर्स लगाने का कार्य चल रहा है। (MP News)

कलेक्टर ने कहा…

भिंड व मुरैना की बसों के परमिट आईएसबीटी पर शिफ्ट करा दिए हैं। एक बार फिर से ऑपरेटरों के साथ संयुक्त बैठक बुलाने वाले हैं। एक और चर्चा करने के बाद बसों को आईएसबीटी से चलाया जाएगा।- रुचिका चौहान, कलेक्टर