
Endometriosis Symptoms (photo- gemini ai)
Endometriosis Symptoms: लाखों महिलाएं सालों से एक ऐसी बीमारी से जूझ रही हैं, जिसे अक्सर नॉर्मल पीरियड पेन कहकर टाल दिया जाता है। इस बीमारी का नाम है एंडोमेट्रियोसिस। यह एक क्रॉनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली समस्या है, जो न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग पर भी गहरा असर डालती है।
एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी टिश्यू शरीर के दूसरे हिस्सों में बढ़ने लगती है। इससे पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, सेक्स के समय दर्द, पेशाब या शौच के दौरान परेशानी, पेट फूलना, थकान, मतली और लगातार पेल्विक पेन जैसी दिक्कतें होती हैं। कई महिलाओं में चिंता, डिप्रेशन और मानसिक तनाव भी देखने को मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि 30 से 50 प्रतिशत महिलाएं बांझपन (Infertility) का भी सामना करती हैं।
अब नई रिसर्च ने एक अहम बात साफ कर दी है, हर महिला में एंडोमेट्रियोसिस एक जैसी नहीं होती। फ्रांस की बायोटेक कंपनी Endogene से जुड़े वैज्ञानिकों ने एडवांस सेल एनालिसिस के जरिए पाया कि यह बीमारी मॉलिक्यूलर लेवल पर हर मरीज में अलग होती है। सीधे शब्दों में कहें तो, जो दवा एक महिला पर काम करती है, जरूरी नहीं वही दूसरी पर असर दिखाए।
यह खोज इसलिए जरूरी है क्योंकि अब तक एंडोमेट्रियोसिस को एक ही बीमारी मानकर एक जैसा इलाज किया जाता रहा है। ठीक वैसे ही, जैसे पहले ब्रेस्ट कैंसर को एक ही तरह से ट्रीट किया जाता था। जब यह समझ आया कि ब्रेस्ट कैंसर के भी अलग-अलग टाइप होते हैं, तब इलाज ज्यादा असरदार हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि एंडोमेट्रियोसिस में भी अब पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट की जरूरत है।
रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि वैज्ञानिकों को बीमारी से जुड़े संकेत मासिक धर्म के खून में भी मिले। अब तक बीमारी को समझने के लिए सर्जरी जरूरी होती थी, लेकिन अगर पीरियड्स के खून से ही जांच संभव हो जाए, तो यह महिलाओं के लिए बड़ी राहत होगी। इससे बिना ऑपरेशन बीमारी की पहचान, इलाज का चुनाव और बीमारी की निगरानी की जा सकेगी।
भारत में फिलहाल एंडोमेट्रियोसिस का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। दर्द कम करने की दवाएं, हार्मोन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक नई तकनीक आम नहीं हो जाती, तब तक गायनाकोलॉजिस्ट, पेन स्पेशलिस्ट और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की टीम के साथ इलाज सबसे बेहतर रास्ता है।
यह नई रिसर्च एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही महिलाओं के लिए उम्मीद लेकर आई है। आने वाले समय में इलाज लक्षणों पर नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ पर आधारित होगा, जिससे दर्द कम होगा, गलत इलाज से बचाव होगा और जिंदगी की क्वालिटी बेहतर हो सकेगी।
Published on:
05 Feb 2026 05:45 pm
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