10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Fake Medicine Racket: Liv-52 के नाम पर जहर! नकली दवाइयों से लिवर मरीजों की जान खतरे में

Fake Medicine Racket: गाजियाबाद के मुरादनगर में नकली Liv-52 दवाइयों का बड़ा खुलासा। जानिए नकली दवाइयों से लिवर को कितना खतरा और कैसे करें बचाव।

2 min read
Google source verification
Fake Medicine Racket

Fake Medicine Racket (Photo- gemini ai)

Fake Medicine Racket: गाजियाबाद के मुरादनगर इलाके में नकली दवाइयों के कारोबार का खुलासा सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चेतावनी है। इस मामले में लिवर की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली मशहूर दवा Liv-52 की भारी मात्रा में नकली खेप पकड़ी गई है। पुलिस की स्वॉट टीम ग्रामीण जोन और मुरादनगर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ और 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

नकली दवाइयां, असली सेहत को खतरा

Liv-52 जैसी दवाइयां लिवर को मजबूत करने, फैटी लिवर, पाचन संबंधी समस्याओं और शराब से होने वाले लिवर डैमेज में इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में अगर मरीज को असली दवा की जगह नकली टैबलेट मिल जाए, तो इलाज होने के बजाय बीमारी और गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाइयों में सही मात्रा में जरूरी तत्व नहीं होते, जिससे लिवर पर उल्टा असर पड़ सकता है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

कैसे हुआ खुलासा

इस पूरे मामले की शुरुआत एक नामी दवा कंपनी की शिकायत से हुई। कंपनी ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज, नकली जीएसटी नंबर और जाली औषधि लाइसेंस के सहारे Liv-52 की नकली टैबलेट बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। ये दवाइयां ट्रांसपोर्ट के जरिए अलग-अलग शहरों तक भेजी जा रही थीं, जिससे हजारों मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती थी।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद कम लागत में नकली दवाइयां तैयार करते थे। एक डिब्बी टैबलेट बनाने में करीब 35 से 40 रुपये खर्च होते थे, जिसे वे 100 रुपये या उससे ज्यादा में बेचते थे। जबकि असली दवा की कीमत इससे कहीं ज्यादा होती है। यही वजह है कि मरीजों को शक भी नहीं होता और वे आसानी से नकली दवा खरीद लेते हैं।

क्या-क्या बरामद हुआ

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 50 हजार नकली टैबलेट, 500 रेपर शीट, 1200 ढक्कन, 1200 प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार बरामद की। आरोपियों ने बताया कि डिब्बी, ढक्कन और रेपर अलग-अलग जगहों से बनवाए जाते थे, जबकि टैबलेट बाहर की लैब से तैयार कराई जाती थीं।

मरीजों के लिए जरूरी सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को दवा खरीदते समय बेहद सतर्क रहना चाहिए। हमेशा विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से ही दवा लें, पैकिंग, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। अगर दवा से कोई असामान्य असर दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध

पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। नकली दवाइयों के इस गोरखधंधे को खत्म करना बेहद जरूरी है, ताकि आम लोगों की सेहत सुरक्षित रह सके।