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अवैध कॉलोनी कटी तो कॉलोनाइजर को होगी ’10 साल’ की जेल, कलेक्टर होंगे जवाबदेह

MP News: निगम का कॉलोनी सेल सिर्फ 125 कॉलोनियों को ही नियमित कर सका है, जबकि 500 से ज्यादा कॉलोनियां सूची में लंबित हैं।

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illegal colony

illegal colony (Photo Source - Patrika)

MP News: अवैध कॉलोनी काटने पर अब सिर्फ कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अफसर भी कठघरे में होंगे। राज्य सरकार अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। प्रस्तावित नए अधिनियम में अवैध कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर को 10 साल तक की जेल और एक करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है। कलेक्टर सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

500 से ज्यादा कॉलोनियां सूची में लंबित

नगर निगम सीमा और पंचायत क्षेत्रों में नेताओं और अफसरों की मिलीभगत से जिले में एक हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियां कट चुकी है, प्रदेश में इनकी संख्या पांच हजार से ज्यादा बताई जा रही है। इन कॉलोनियों को वैध करने के प्रयास सालों से चलते रहे, लेकिन निगम का कॉलोनी सेल सिर्फ 125 कॉलोनियों को ही नियमित कर सका है, जबकि 500 से ज्यादा कॉलोनियां सूची में लंबित हैं।

हर चुनाव से पहले अवैध कॉलोनियों की मैपिंग का शोर होता है, लेकिन नियमितिकरण के नियम इतने कठोर रहे कि गिनी-चुनी कॉलोनियां ही वैध हो सकीं। निगम की कॉलोनी सेल के पास 600 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की सूची है, लेकिन इनमें से सिर्फ सवा सौ के करीब कॉलोनियां ही नियमितिकरण में आ पाई है। यही स्थिति पूरे प्रदेश की है। पंचायत क्षेत्रों में सरपंच और सचिवों द्वारा बिना मूलभूत सुविधाओं के ही अनुमतियां दे दी गई, जिससे अवैध कॉलोनियां तेजी से विकसित होती रहीं।

एक भी अधिकारी पर नहीं हुई कार्रवाई

अवैध कॉलोनियों के मामलों में थाना प्रभारी से लेकर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। नए कानून में पहली बार यह प्रावधान किया जा रहा है कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित होती है तो कलेक्टर तक को जवाबदेह माना जाएगा। साथ ही नगरीय विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कॉलोनाइजेशन नियमों को एकरूप किया जा रहा है। निगम की तरह पंचायत क्षेत्रों में भी सड़क, बिजली, पानी, ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित होने के बाद ही भूखंडों के विक्रय की अनुमति मिलेगी।