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जमीन से 125 फीट नीचे बनेगा इंदौर का ये मेट्रो स्टेशन, बदला गया डिजाइन

Indore Metro Project: प्रस्तावित अंडरग्राउंड स्टेशन अब जमीन से करीब 125 फीट नीचे बनेगा। सॉफ्ट मिट्टी और नीचे मिली हार्ड रॉक के कारण डिजाइन में बड़ा बदलाव किया गया है।

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इंदौर

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Akash Dewani

Feb 13, 2026

indore Metro project proposed underground station will feet 125 feet below ground mp news

indore Metro project proposed underground station (Patrika.com)

MP News: इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट (Indore Metro Project) में छोटा गणपति क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरग्राउंड स्टेशन शहर का सबसे गहरा स्टेशन होगा। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मिट्टी परीक्षण (सॉइल इन्वेस्टिगेशन) रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया है कि यह स्टेशन जमीन से करीब 38 मीटर यानी लगभग 125 फीट नीचे बनाया जाएगा। आमतौर पर अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन 22 से 25 मीटर (60-70 फीट) गहराई पर बनाए जाते है।

जानकारी के अनुसार, छोटा गणपति क्षेत्र की जमीन में ऊपरी परत सॉफ्ट है, जबकि पथरीला (हार्ड रॉक) हिस्सा काफी नीचे मिला है। सुरक्षित निर्माण और स्थायित्व के लिए स्टेशन की खुदाई ज्यादा गहराई तक करने का निर्णय लिया है। इसके लिए आधुनिक मशीनों और विशेष तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

स्टेशन गहराई पर बनाने से सतह पर कम जगह घिरेगी

क्षेत्र में चल रहे विरोध और स्थानीय चिंताओं को देखते हुए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि स्टेशन को अधिक गहराई पर बनाने से सतह पर कम जगह घिरेगी और आसपास के मौजूदा निर्माणों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। दावा किया गया है कि बगीचे की निर्धारित जमीन के अलावा अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और किसी भवन को तोड़ने की नौबत नहीं आएगी। अधिकारियों द्वारा स्थानीय लोगों को तकनीकी स्थिति समझाने के बाद ही आगे का काम तेज किया जाएगा।

एमजी रोड थाने के पिछले हिस्से में स्टेशन का काम तेज

एमजी रोड थाने के पिछले हिस्से स्थित खेल मैदान क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए खुदाई तेज हो गई है। यहां मल्टीलेवल पार्किंग को हाल ही में हटाया गया है और पोकलेन मशीनों से खुदाई की जा रही है। साइट पर बड़ा गड्‌ढा तैयार कर स्ट्रक्चरल कार्य की तैयारी शुरू कर दी गई है।

ज्यादा नीचे है हार्ड रॉक

इंजीनियरों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में जहां हार्ड रॉक ऊपरी स्तर पर मिल जाती है, वहां स्टेशन कम गहराई पर बनाना संभव होता है। छोटा गणपति की प्रस्तावित साइट पर यह परत नीचे मिलने के कारण डिजाइन और गहराई दोनों में बदलाव किया गया है। (MP News)