
live robotic surgery
indore news: मध्यप्रदेश के इंदौर में यूरोलॉजिस्ट्स सर्जन्स सोसायटी ने यूरोलॉजी कांफ्रेंस शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की। इसकी शुरुआत सुबह सुपर कॉरिडोर पर साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉक्टरों, सर्जनों और युवा रेजिडेंट्स ने भाग लिया। पूरे मार्ग पर ‘डॉक्टर फिट तो देश फिट’ का नारा गूंजता रहा। इसके बाद कांफ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें चिकित्सा विज्ञान का आधुनिक और हाईटेक स्वरूप देखने को मिला।
साइक्लोथॉन के बाद कांफ्रेंस में चिकित्सा विज्ञान का आधुनिक और हाईटेक स्वरूप देखने को मिला। 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और देश के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट्स ने रोबोटिक, लेजर और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की नवीनतम तकनीकों पर सत्र लिए। विशेषज्ञों द्वारा लाइव सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे बड़ी संख्या में डॉक्टरों और सर्जनों ने देखा।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में किडनी स्टोन, प्रोस्टेट बढ़ना, पेशाब में जलन या खून आना, बार-बार यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर और किडनी कैंसर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके प्रमुख कारण कम पानी पीना, जंक फूड, धूम्रपान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और पेशाब रोकना हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि रोज 3-4 लीटर पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, नमक और तले-भुने भोजन से बचें, 40 वर्ष की उम्र के बाद सालाना जांच जरूर कराएं।
डॉ. सुशील भाटिया ने कहा कि यहां प्रदर्शित रोबोटिक और लेजर तकनीक मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। डॉ. संजय शिंदे ने कहा, ‘स्वस्थ जीवनशैली ही हर बीमारी की पहली दवा है। लोग फिट रहेंगे तो अस्पतालों की जरूरत कम पड़ेगी। डॉ. नितीश पाटीदार ने बताया कि 70 से अधिक इंटरनेशनल फैकल्टी और इतने बड़े स्तर की लाइव सर्जरी का इंदौर में होना गर्व की बात है। डॉ. रवि नागर ने कहा कि यहां सीखी गई तकनीकें छोटे शहरों और गांवों तक बेहतर इलाज पहुंचाने में मदद करेंगी। डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि लोग शर्म या लापरवाही के कारण यूरोलॉजी की समस्याएं छिपा लेते हैं, जबकि समय पर जांच से अधिकतर बीमारियां पूरी तरह ठीक हो सकती हैं।
कांफ्रेंस के दौरान यूरोलॉजिस्ट्स और सर्जनों को रोबोटिक सर्जरी का हैंड्स-ऑन अनुभव भी दिया गया। इसके लिए मोबाइल रोबोटिक सर्जरी बस के माध्यम से सर्जिकल सिस्टम का लाइव डेमो कराया गया। यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के ऑनरेरी सेक्रेटरी उत्तम मेट्टे ने कहा कि मिनिमली इनवेसिव इलाज के बढ़ते उपयोग के साथ टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अनुभव और प्रमाण पर आधारित होने चाहिए। इस तरह की संरचित ट्रेनिंग से सर्जन और ऑपरेशन टीम को सिस्टम, वर्क फ्लो और सुरक्षा पहलुओं की बेहतर समझ मिलती है।
यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्य अनंत कुमार ने बताया, भारत में 1500 से ज्यादा सर्जन रोबोटिक सर्जरी की ट्रेनिंग ले चुके हैं। 200 से अधिक रोबोटिक सिस्टम सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्यरत हैं। डॉक्टरों की बढ़ती रुचि, मरीजों में जागरुकता और जटिल सर्जरी में सटीकता की जरूरत के कारण इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
Published on:
30 Jan 2026 09:44 pm
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