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चौमूं में आंवले का करोड़ों का कारोबार, बंद मंडी ने रोकी आंवला उद्योग की उड़ान

Multi-crore rupee amla (Indian gooseberry) industry: आंवले की खेती में पहचान बना चुके चौमूं क्षेत्र में हर साल करोड़ों का कारोबार होता है। यहां करीब 350 हेक्टेयर में आंवले की पैदावार होती है और सीजन में 1,075 टन उत्पादन निकलता है।

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चौमूं क्षेत्र में आंवले की तुड़ाई करता किसान, पत्रिका फोटो

चौमूं क्षेत्र में आंवले की तुड़ाई करता किसान, पत्रिका फोटो

Multi-crore rupee amla (Indian gooseberry) industry: आंवले की खेती में पहचान बना चुके चौमूं क्षेत्र में हर साल करोड़ों का कारोबार होता है। यहां करीब 350 हेक्टेयर में आंवले की पैदावार होती है और सीजन में 1,075 टन उत्पादन निकलता है। यहां से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, हरिद्वार, नीमच, अलवर और बेंगलुरु तक इसकी सप्लाई होती है।

विदेशों में भी फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इंग्लैंड और पोलैंड जैसे देशों में चौमूं का आंवला पहुंच रहा है, लेकिन बंद पड़ी मंडी किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है, यदि सरकार इस पर ध्यान दे और मंडी को पुनः शुरू करे तो आंवला उद्योग को नई उड़ान मिल सकती है और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है।

जानकारी के अनुसार चौमूं इलाके में आलीसर, सामोद, कुशलपुरा, फतेहपुरा, विजयसिंहपुरा, इटावा, हाड़ौता, नांगल भरड़ा, अमरपुरा, तिगरिया और निवाणा गांवों में आंवले की खेती होती है। यहां की पैदावार देशभर में पहचान बना चुकी है।

सप्लाई और डिमांड

दिल्ली की खारीबावड़ी सूखे आंवले की सबसे बड़ी मंडी है। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश के नीमच, हरिद्वार स्थित पतंजलि, अलवर के प्लांट और बेंगलुरु में चौमूं इलाके के आंवले की भारी मांग रहती है, विदेशों में भी चौमूं का आंवला निर्यात हो रहा है।

5 करोड़ की लागत से बनी मंडी बंद

किसानों की मेहनत को पंख देने वाली 5 करोड़ की लागत से बनी आंवला मंडी आज भी बंद पड़ी है। वर्ष 2008 में हाथनोदा (भोपावास) में 16 बीघा में बनाई गई यह विशिष्ट मंडी प्रशासनिक अनदेखी के चलते सालों से ताले में जकड़ी हुई है। प्लेटफॉर्म, बोरिंग, सीडब्ल्यूआर टंकी जर्जर हो चुके हैं। गेट, खिड़कियां और दरवाजे तक टूट चुके हैं। मंडी का नाम कागजों में ही चल रहा है, जबकि किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। सरकार ने आलीसर में भी आंवला ग्राम घोषित कर आंवले के बगीचे लगवाए थे, लेकिन इसके बाद सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

किसानों की प्रतिक्रिया

बांसा निवासी व्यापारी जयनारायण मीणा ने बताया कि क्षेत्र में आंवले की पैदावार खूब होती है। चौमूं में बंदी पड़ी मंडी चालू हो जाए तो उपज का उचित दाम और बाजार मिलेगा। अभी दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में तक माल भेजना पड़ रहा है।

किसान शंकरलाल ने बताया कि सरकारी प्रोत्साहन मिले तो आंवला उद्योग यहां हजारों लोगों को रोजगार दे सकता है। मंडी बंद रहने से हम मजबूर होकर निजी व्यापारियों पर निर्भर हैं।

इनका कहना है।

चौमूं इलाके में आंवले की बढियां पैदावार है। यहां से देश के विभिन्न प्रदेशों में आंवले की आपूर्ति होती है। मंडी के संबंध में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।
शिवकुमार पारीक, सहायक कृषि अधिकारी उद्यान चौमूं