12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Budget: ‘2026 की हकीकत से दूरी, 2047 के सपने दिखा रहे’, बजट को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा तंज

Rajasthan Politics: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को विधानसभा में पेश राज्य बजट को खोखला, सतही और प्रदेश की प्रगति को रोकने वाला दस्तावेज बताया।

2 min read
Google source verification
Rajasthan Congress
Play video

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा। फोटो: पत्रिका

जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को विधानसभा में पेश राज्य बजट को खोखला, सतही और प्रदेश की प्रगति को रोकने वाला दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि जो बजट पिछले भाषणों की पुनरावृत्ति पर आधारित हो, राजस्थान का भविष्य नहीं संवार सकता। जूली ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियो का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है, जबकि वास्तविकता कुछ और है।

टीकाराम जूली ने दावा किया कि पिछले दो बजटों की 2718 घोषणाओं में से केवल 900 (करीब 30 फीसदी) ही पूरी हुई हैं, जबकि 284 परियोजनाओं पर काम शुरू तक नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 2026 की जमीनी हकीकत से दूर है और जवाबदेही से बचने के लिए 2047 के सपने दिखा रही है।

जल जीवन मिशन पर घेरा

जूली ने कहा कि वित्त मंत्री ने दो वर्षों में 45 लाख नल कनेक्शन देने का वादा किया था, लेकिन सदन में स्वयं स्वीकार किया कि केवल 14 लाख कनेक्शन ही दिए गए। नमो वन और नमो नर्सरी जैसी घोषणाओं को उन्होंने चापलूसी की राजनीति बताया। जूली ने 42,000 जर्जर स्कूलों की स्थिति, सीएम राइज जैसे नामों और रिफाइनरी के लोकार्पण में देरी को सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न बताया। उन्होंने कहा कि भरतपुर सहित कई जिलों की अनदेखी से स्पष्ट है कि सरकार के पास ठोस रोडमैप नहीं है।

डोटासरा बोले, केवल घोषणाओं का दोहराव

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राज्य बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इसमें प्रदेश की प्रगति के लिए अपेक्षित वित्तीय प्रावधान नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि यमुना जल परियोजना और ईआरसीपी का जिक्र तो हुआ, लेकिन कोई बजट आवंटन या समय सीमा स्पष्ट नहीं की गई। निवेश, रोजगार सृजन और राइजिंग राजस्थान के परिणामों पर सरकार मौन रही। जर्जर स्कूल भवनों के लिए 21 हजार करोड़ की आवश्यकता के बावजूद सीमित राशि का प्रावधान किया गया।