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साबरमती किनारे दौड़ेंगी ई-बसें, द्रव्यवती पर 1600 करोड़ खर्च…फिर भी सफाई अधूरी

पड़ोसी राज्य गुजरात के अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर अब सार्वजनिक परिवहन की एंट्री होने जा रही है। आने वाले कुछ माह में नदी के नौ किमी के हिस्से में ई-बसों का संचालन होता नजर आएगा। इस पर 991 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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जयपुर-अहमदाबाद. पड़ोसी राज्य गुजरात के अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर अब सार्वजनिक परिवहन की एंट्री होने जा रही है। आने वाले कुछ माह में नदी के नौ किमी के हिस्से में ई-बसों का संचालन होता नजर आएगा। इस पर 991 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं, जयपुर की बात करें तो द्रव्यवती रिवरफ्रंट पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद आज भी बदहाली और अव्यवस्था की तस्वीर नजर आ रही है।वहां इलेक्ट्रिक बसों के साथ रिवरफ्रंट को शहर की लाइफलाइन बनाने की तैयारी है, तो यहां द्रव्यवती परियोजना पर सवाल है कि भारी बजट के बावजूद नदी क्यों नहीं सुधरी? द्रव्यवती नदी का सौंदर्यीकरण करते समय सपना दिखाया गया था कि नदी किनारे साइकिल चला सकेंगे, लेकिन अब तक ऐसा हो नहीं पाया।

साबरमती रिवरफ्रंट
-38 किमी की इस परियोजना का काम वर्ष 2012 में हुआ था शुरू
-06 चरणों में काम को किया जा रहा है पूरा, अब तक ही पूरा हो पाया
साबरमती नदी के बेस पर विकसित रिवरफ्रंट परियोजना का उद्देश्य शहर में एक सार्वजनिक स्थान, मनोरंजन स्थल और सुलभ परिवहन कॉरिडोर बनाना है। हाल ही अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस (एएमटीएस) ने घोषणा की है कि रिवरफ्रंट के दोनों किनारों पर सार्वजनिक बस सेवा शुरू की जाएगी।

बेहतर पहलू
-पर्यावरण और सार्वजनिक उपयोग: इस परियोजना में सार्वजनिक मनोरंजन स्थान, पार्क और पैदल मार्ग विकसित किए हैं, जिससे नागरिकों के लिए सामाजिक गतिविधियां और खुला स्थान उपलब्ध हुआ है।
-परिवहन एकीकरण का विस्तार: सार्वजनिक बस सेवा को रिवरफ्रंट के दोनों किनारों तक विस्तारित करने की योजना शहर में पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देगी। इससे लोगों की आवाजाही सुगम होगी।

द्रव्यवती रिवरफ्रंट
-46 किमी में फैली द्रव्यवती नदी का काम एक साथ हुआ चालू
-1600 करोड़ रुपए जेडीए ने खर्च किए हैं नदी के सौंदर्यीकरण पर
द्रव्यवती जयपुर की एक ऐतिहासिक नदी है। बीते वर्षों में इस नदी ने नाले का रूप ले लिया। सीवर का पानी इस नदी में वर्षों तक बहा। वर्ष 2016 में इसे इसे पुनर्जीवित करने का काम जेडीए ने शुरू किया और करीब 1600 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया। नदी को विकसित करने का उद्देश्य नाले को सुंदर नदी में बदलकर शहर के सौंदर्यीकरण और हरी-भरी लीक स्पेस तैयार करना था।

बेहतर पहलू
-सीवर खुले में बहना बंद: नदी किनारे रहने वाली करीब चार लाख की आबादी नाले की वजह से परेशान थी। सीवरेज खुले में न बहें, इसके लिए पांच एसटीपी लगाए। इससे लोगों को राहत मिली।
-जलस्तर बढ़ाने का प्रयास: बरसात के दिनों में जमीन में अधिक पानी जाए, इसके लिए सांगानेर क्षेत्र में 25 नए वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। बरसात खत्म होने के बाद एसटीपी से पानी लिया जाएगा।
-ग्रीन एरिया आकर्षित करता: नदी के किनारे बर्ड पार्क, बॉटनीकल पार्क और लैंडस्कैप पार्क विकसित किए गए हैं। यहां अच्छी ग्रीनरी है। सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग यहां सैर करने के लिए आते हैं।

द्रव्यवती नदी के पिछड़ने के ये कारण
-अब तक अधूरा कार्य और जगह-जगह गंदगी है।
-सीवरेज और नाले का पानी नदी में रहा है।
-रखरखाव को लेकर भी जेडीए और फर्म के बीच विवाद रहा।