
जयपुर. जेएलएन मार्ग पर घूमती नीलगाय। फोटो रघुवीर सिंह
Man Animal Conflict Rajasthan: जयपुर. इन दिनों देशभर के वन क्षेत्रों से सटे आबादी वाले इलाकों में लगातार वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ती जा रही है, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की चिंता गहराती जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अब वन्यजीव केवल जंगल की सीमा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे आबादी में घुसते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका सीधा असर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर पड़ रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों का आबादी की ओर आना इस बात का संकेत है कि जंगलों में उनके प्राकृतिक आवास और भोजन पर दबाव बढ़ रहा है। खासकर हिरण जहां जाते हैं, उनके पीछे तेंदुए, बाघ जैसे हिंसक वन्यजीव भी आबादी की ओर खिंचे चले आते हैं। इसी वजह से बीते कुछ समय में हमलों और अप्रिय घटनाओं में इजाफा देखा गया है, जो मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि कई बार हिरण व अन्य वन्यजीव अचानक सडक़ पर आ जाते हैं। इससे सडक़ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें न केवल वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि हिरणों की भी मौत या गंभीर चोट की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मानव और हिरण, दोनों प्रजातियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। वन विभाग और विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में जंगलों के संरक्षण, भोजन की उपलब्धता और आबादी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
नवंबर 2025: जयपुर के गुर्जर घाटी इलाके में एक तेंदुआ रिहायशी घर में घुस गया, जहां उसने एक महिला पर हमला किया।
नवंबर 2025: दुर्गापुरा में रात 2 बजे तेंदुआ सीसीटीवी में कैद हुआ, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
नवंबर-दिसंबर 2025: जयपुर में एक सप्ताह में तीन से अधिक तेंदुआ दर्शन—शास्त्रीनगर, गोपालपुरा, सिविल लाइंस, चांदपोल, विद्याधर नगर और मालवीय नगर जैसे इलाकों में। कई मामलों में तेंदुओं को ट्रैंक्विलाइज कर रेस्क्यू किया गया।
दिसंबर 2025: सिविल लाइंस (वीवीआई क्षेत्र) में सुबह के समय तेंदुआ घुसा, दो घंटे तक छिपता रहा, वन टीम ने उसे सुरक्षित पकड़ा।
हालिया ट्रेंड: जयपुर के झालाना-अमागढ़ लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व के पास शहर की बढ़ती घुसपैठ से संघर्ष बढ़ा। पिछले कुछ महीनों में आधा दर्जन से ज्यादा तेंदुआ घुसपैठ की घटनाएं दर्ज। एक मामले में स्थानीय लोगों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला।
Updated on:
22 Jan 2026 04:08 pm
Published on:
22 Jan 2026 03:35 pm
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