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Rajasthan Budget 2026 : बजट स्पीच की ‘शायरी’ से धमाकेदार शुरुआत, दिया कुमारी का विपक्ष को ‘दो-टूक’ जवाब

राजस्थान विधानसभा में बजट का दिन केवल आंकड़ों और घोषणाओं का नहीं होता, बल्कि यह वाकयुद्ध, हाजिरजवाबी और 'शायराना' अंदाज का भी गवाह बनता है। बुधवार को जब वित्त मंत्री दिया कुमारी अपना 'केसरिया' बजट बैग लेकर सदन में पहुंचीं, तो उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत किसी नीरस आर्थिक आंकड़े से नहीं, बल्कि एक दमदार और चुटीली शायरी से की।

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diya kumari

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट पेश करने की परंपरा में 'शायरी' का तड़का हमेशा से ही सुर्खियां बटोरता रहा है। लेकिन आज जब उप-मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने भजनलाल सरकार का तीसरा बजट पढ़ना शुरू किया, तो उनके तेवर पहले से कहीं अधिक आक्रामक और आत्मविश्वास से भरे थे। बजट के भारी-भरकम दस्तावेजों को खोलने से पहले दिया कुमारी ने विपक्ष की ओर देखते हुए एक ऐसी शायरी पढ़ी, जिसने सदन के माहौल को पूरी तरह बदल दिया।

"कश्ती चलाने वालों ने..." , विपक्ष पर तीखा प्रहार

दिया कुमारी ने अपनी शायरी के जरिए पिछली सरकार (अशोक गहलोत सरकार) द्वारा छोड़ी गई आर्थिक चुनौतियों और 'मझधार' जैसी स्थिति पर निशाना साधा। उन्होंने पढ़ा:

''कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें,
लहर-लहर तूफान मिले और संग-संग मझधार हमें,
फिर भी दिखाया है हमने और फिर भी दिखा देंगे सबको,
कि इन हालातों में भी आता है दरिया करना पार हमें..''

इस शायरी के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि उन्हें विरासत में एक 'डूबती हुई कश्ती' (खराब आर्थिक हालात) मिली थी, लेकिन भाजपा सरकार इन तूफानों से टकराकर प्रदेश को सुरक्षित किनारे (विकास) तक ले जाने का हुनर जानती है।

शायरी का 'सियासी डिकोडिंग'

राजनीतिक गलियारों में इस शायरी के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं:

विपक्ष पर तंज: 'हार के दी पतवार' कहकर उन्होंने कांग्रेस की हार और उनके द्वारा छोड़े गए कर्ज के बोझ की ओर इशारा किया।

चुनौतियों का स्वीकार: 'लहर-लहर तूफान' का मतलब उन वित्तीय बाधाओं और लंबित योजनाओं से है जो सरकार के सामने चुनौती बनकर खड़ी थीं।

आत्मविश्वास का प्रदर्शन: 'दरिया पार करना' यह दर्शाता है कि भजनलाल सरकार न केवल इन समस्याओं को सुलझा रही है, बल्कि प्रदेश को 'विकसित राजस्थान' बनाने की ओर अग्रसर है।

'मेज' थपथपाने लगे सत्ता पक्ष के विधायक

जैसे ही वित्त मंत्री ने शायरी की आखिरी लाइन पढ़ी, सदन मेजों की थपथपाहट से गूँज उठा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित तमाम मंत्रियों ने मुस्कराते हुए तालियां बजाईं। यह शायरी केवल मनोरंजन के लिए नहीं थी, बल्कि बजट पेश करने से पहले एक मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने की रणनीति थी।

बजट और शायरी का अटूट रिश्ता

राजस्थान के बजट इतिहास में यह पहली बार नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी चुटीली टिप्पणियों और शायरी के लिए जाने जाते थे, वहीं वसुंधरा राजे भी अपने बजट भाषणों में अक्सर कविताओं का सहारा लेती रही हैं।

दिया कुमारी ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह साबित किया कि वे अब पूरी तरह से राजनीति और संसदीय विधाओं में 'परिपक्व' हो चुकी हैं।

शायरी के बाद 'आंकड़ों' की बारिश

शायरी के तुरंत बाद दिया कुमारी ने कई बड़ी योजनाओं का पिटारा खोल दिया। शायरी ने जो माहौल बनाया था, उसे उन्होंने दमदार घोषणाओं से और मजबूत कर दिया। विपक्ष जो शुरुआत में टोका-टाकी करने की तैयारी में था, वह इस शायराना हमले के बाद कुछ देर के लिए रक्षात्मक नजर आया।

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