
जयपुर। आजादी के बाद पूर्व राजपरिवारों और चुनावी राजनीति के बीच संबंधों पर बातचीत करते हुए जोधपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य गज सिंह ने कहा कि मेरे परिवार के सभी सदस्य किसी न किसी तरह राजनीति में शामिल रहे। मैं राज्यसभा सांसद रहा, लेकिन इसे ज्यादा पसंद नहीं किया। मैंने इंदिरा गांधी को भी देखा। मुझे अपने काम खुद करना और लोगों की सेवा करना बेहतर लगा।
गज सिंह शुक्रवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित सत्र 'फर्स्ट एडिशन: बापजी, महाराजा ऑफ मारवाड़–जोधपुर: द किंग हू वुड बी मैन' में बोल रहे थे। सत्र के दौरान गज सिंह ने अपने जीवन, परिवार, राजघरानों की भूमिका और भारतीय इतिहास के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुलकर विचार साझा किए।
भारत के निर्माण में राजपूतों के योगदान पर गज सिंह ने कहा कि
हमें अपनी जाति पर गर्व है, लेकिन राजा की कोई जाति नहीं होती है। 1960 और 1970 के दशक के दौरान पूर्व राजघरानों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया गया। हमने अपने धर्म को बनाए रखते हुए देश के लिए लड़ाई लड़ी है। यही कारण है कि भारत कभी पूरी तरह से मुस्लिम राष्ट्र नहीं रहा। गज सिंह ने 'बापजी' बनने के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले थे। मुझे सिखाया गया था कि राजा की कोई जाति नहीं होती है। सच्चा राजधर्म विभिन्न जातियों के बीच सामंजस्य और संतुलन स्थापित करना है।
फिर से राजा बनने के एक सवाल के जवाब में गज सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर राजा बनना पसंद करूगा, लेकिन आज के दौर का नहीं, मेरे दादा के दौर का राजा बनना चाहूंगा।
फ्रंट लॉन में आयोजित सत्र में लेखकों अमन नाथ और योगी वैद्य की पुस्तक पर चर्चा हुई। गज सिंह और लेखकों के साथ इतिहासकार रीमा हूजा से संवाद किया। इससे पहले गज सिंह पर लिखी गई इस पुस्तक को लॉन्च किया गया। गजसिंह ने बताया कि यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक परंपरा, जिम्मेदारी और समय के साथ बदलते भारत की यात्रा है।
Published on:
16 Jan 2026 10:07 pm
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