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बीकानेर में चल रहे आंदोलन के समर्थन में धोलिया में सास-बहु ने किया अनशन

बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में क्षेत्र के धोलिया गांव में सास-बहू भी अनशन पर है। उनकी ओर से खेजड़ी बचाने की मांग की जा रही है।

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बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में क्षेत्र के धोलिया गांव में सास-बहू भी अनशन पर है। उनकी ओर से खेजड़ी बचाने की मांग की जा रही है। गौरतलब है कि धोलिया गांव निवासी राधेश्याम पेमाणी वन्यजीवप्रेमी थे और खेजड़ी संरक्षण के साथ कई आंदोलनों में भाग लिया था।

इसके साथ ही वे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी कार्य करते थे। गत 23 मई 2025 की रात हिरण शिकार की सूचना पर जाते समय वन्यजीवप्रेमी राधेश्याम पेमाणी सहित चार जनों की मौत हो गई थी। खेजड़ी की कटाई रोकने, उसका संरक्षण करने, कटाई रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने सहित अन्य मांगों को लेकर बीकानेर में आंदोलन शुरू किया गया था। इस 2 फरवरी को 363 लोगों ने बीकानेर में अनशन शुरू किया था। हालांकि गुरुवार को सरकार की ओर से जोधपुर व बीकानेर संभाग में खेजड़ी कटाई रोकने के आदेश जारी किए, लेकिन प्रदेश भर में रोक नहीं लगने से अनशन लगातार जारी है।

घर पर ही कर रहे अनशन

पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण के लिए अपना बलिदान देने वाले धोलिया निवासी राधेश्याम पेमाणी की पहल को उसका परिवार भी आगे बढ़ा रहा है। पेमाणी की मां रतनीदेवी व उसकी पत्नी निरमा विश्नोई भी 2 फरवरी से लगातार अनशन पर है। उन्होंने बताया कि खेजड़ी राजस्थान की जीवन रेखा है, जिसके संरक्षण के लिए सरकार को प्रभावी नीति बनाने की जरुरत है। उन्होंने बताया कि जब खेजड़ी की कटाई पर रोक सहित अन्य मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तब तक उनका अनशन व धरना जारी रहेगा।

नहीं बनी सहमति तो आज पोकरण में धरना

धोलिया ग्राम पंचायत के प्रशासक शिवरतन विश्नोई ने बताया कि खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए प्रदेशभर के लोग मांग कर रहे है। उन्होंने बताया कि धोलिया व खेतोलाई के भी सभी निवासी इस मांग के समर्थन है। उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात तक बीकानेर में चल रहे आंदोलन में कोई सहमति नहीं बनती है और अनशन व धरना जारी रहता है तो धोलिया व खेतोलाई के निवासी पोकरण में उपखंड अधिकारी कार्यालय के समक्ष बेमियादी धरना शुरू करेंगे।