1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धरोहरों की सुंदरता के आड़े आ रहे टावर- साइन बोर्ड

जैसलमेर का ऐतिहासिक सोनार दुर्ग विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी स्वर्णिम आभा और अनूठे स्थापत्य शिल्प के लिए जाना जाता है। दुर्ग के मौलिक स्वरूप को कायम रखने में जिम्मेदार विभागों ने प्राय: उदासीनता ही दिखाई है और दुर्भाग्य यह है कि इसी विश्वविख्यात विरासत की सुंदरता आज भी अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

2 min read
Google source verification

जैसलमेर का ऐतिहासिक सोनार दुर्ग विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी स्वर्णिम आभा और अनूठे स्थापत्य शिल्प के लिए जाना जाता है। दुर्ग के मौलिक स्वरूप को कायम रखने में जिम्मेदार विभागों ने प्राय: उदासीनता ही दिखाई है और दुर्भाग्य यह है कि इसी विश्वविख्यात विरासत की सुंदरता आज भी अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शहर के बीचोबीच और राष्ट्रीय पर्वों से लेकर मरु महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले शहीद पूनमसिंह स्टेडियम क्षेत्र से सोनार दुर्ग को देखने पर बीच में नजर आने वाला मोबाइल टावर न केवल किले के खुले व खिले हुए सौन्दर्य में बाधक जैसा प्रतीत होता है बल्कि फोटोग्राफी में भी बेवजह दर्ज हो जाता है। गौरतलब है कि उक्त टावर पिछले कई वर्षों से खड़ा है। इसके पास पूर्व में जो टावर थे, उन्हें हटाया भी गया, लेकिन एक टावर अब तक हटाया नहीं गया है। उधर, पिछले अर्से हनुमान चौराहा पर लगाया गया साइन बोर्ड बादल विलास के साथ-साथ दुर्ग के विहंगम दृश्य को बुरी तरह बाधित कर रहा है। यही नहीं, नगरपरिषद की तरफ से ही करोड़ों रुपए खर्च कर जिस नेहरू पार्क को गत वर्षों में सजाया-संवारा गया है, यह साइन बोर्ड उसी के मुख्य द्वार के ठीक आगे लगवा दिया गया है। फोटोग्राफी में भी यह बोर्ड बीच में आकर दृश्य सौंदर्य को बिगाड़ देती हैं।

हकीकत: निराश होते हैं पर्यटक

  • पर्यटन नगरी जैसलमेर में बड़ी संख्या में देश-विदेश से आने वाले सैलानी सोनार दुर्ग, नेहरू पार्क और बादल विलास जैसे स्थलों को अपने कैमरों में कैद करने की चाह लेकर पहुंचते हैं। लेकिन जब ऐतिहासिक धरोहर की पृष्ठभूमि में मोबाइल टावर और व्यावसायिक साइन बोर्ड नजर आते हैं, तो उनका उत्साह मंदा पड़ जाता है।
  • कई सैलानियों की तरफ से खुले तौर पर नाराजगी जताई है कि विश्व धरोहर जैसे महत्व के स्थल के आसपास इस तरह के दृश्य अवरोध किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं।
  • सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभाग और प्रशासनिक अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। विरासत संरक्षण की बातें करने वाला तंत्र जमीन पर पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है।… तो गुम होे जाएगी मौलिक पहचान

समय रहते ऐसे दृश्य प्रदूषण को नहीं रोका गया, तो आने वाले वर्षों में सोनार दुर्ग और उसके आसपास का ऐतिहासिक परिदृश्य अपनी मौलिक पहचान खो देगा। जरूरत है कि प्रशासन सख्त निर्णय ले, दृश्य अवरोध हटाए और हेरिटेज जोन में स्पष्ट गाइडलाइन लागू करे। अन्यथा, स्वर्णनगरी की यह अमूल्य विरासत कागजों में तो संरक्षित रहेगी, लेकिन उसकी असली खूबसूरती तस्वीरों और पर्यटकों की यादों से गायब होती चली जाएगी।

  • मोहनलाल पुरोहित, शिक्षाविद्, जैसलमेर