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Jalore: सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो गांव वालों ने अपनी सेविंग से बनवा दिया 4.50 करोड़ का स्कूल, ये हैं खूबियां…

Inspirational Story: जालोर जिले के छोटे से गांव नरसाणा का यह मामला है। सरकार की मदद के बिना ही कक्षा बारह तक का स्कूल बना दिया, जो किसी हवेली से कम नहीं है।

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Jalore School Pic

Inspirational Story: राजस्थान का जालोर जिला वैसे तो छोटा सा जिला है, लेकिन उसके एक छोटे से गांव में इतना बड़ा काम हुआ कि पूरे प्रदेश को हिला दिया है। गांव के लोगों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सरकार के आगे हाथ जोड़े, फाइलें दौड़ाईं, एज्यूकेशन के लिए अफसरों से मुलाकातें कीं… लेकिन जब बात नहीं तो खुद ही बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए मैदान में आ डटे। गांव के लोगों ने अपने सेविंग से साढ़े चार करोड़ रुपए का स्कूल बना दिया और इसे अब सरकार को सुपुर्द करने की तैयारी की जा रही है। जालोर जिले के छोटे से गांव नरसाणा का यह मामला है। सरकार की मदद के बिना ही कक्षा बारह तक का स्कूल बना दिया, जो किसी हवेली से कम नहीं है।

पांच जर्जर कमरों में पढ़ रहे थे साढ़े चार सौ बच्चे

दरअसल नरसाणा गांव में जो सरकारी स्कूल था, वैसे तो उसमें सात कमरे थे, लेकिन उनमें एक प्रिंसपल रूम कम लाईब्रेरी और दूसरा स्टोर रूम था। उसके अलावा पांच कमरों में साढ़े चार सौ बच्चे पढ़ने को मजबूर थे। ऐसे में गांव के लोगों ने कई बार सरकार से मदद की गुहार लगाई। मजबूरी में कई छात्र बरामदों में बैठकर पढ़ते थे। गर्मी, सर्दी और बारिश हर मौसम में बच्चों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी थी।

जमीन मिली लेकिन निर्माण बजट के लिए चक्कर काटती रही फाइल

सरकारी अधिकारियों के कई चक्कर काटे, पत्र व्यवहार जारी रहा, तब जाकर सरकार ने गांव में स्कूल को बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू किए। हालांकि सरकार ने सिर्फ जमीन ही चिंहित की, लेकिन उसमें कभी निर्माण के बारे में नहीं सोचा। ऐसे में जब गांव के लोग परेशान हो गए तो साल 2021 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। गांव की उस समय की सरपंच दुर्गा कंवर के ससुर और पूर्व एडिशनल बीडीओ जसवंत सिंह की पहल पर गांव के मंदिर में बैठक बुलाई गई। इसी बैठक में तय हुआ कि अब गांव अपने बच्चों का भविष्य खुद बनाएगा।

51 हजार से लेकर 21 लाख रूपए तक का मिला सहयोग

इस फैसले ने एक ऐतिहासिक काम किया जो गांव क्या पूरे शहर में ही नहीं हुआ था। नरसाणा के ग्रामीणों ने अपनी सेविंग और गांव से बाहर जाकर बसे लोगों से भी मदद लेना शुरू किया। किसी ने 51 हजार दिए तो किसी ने 21 लाख तक की मदद की। मदद का यह काम कई महीनों तक जारी रहा और उसके बाद इस मदद को सार्वजनिक किया गया तो पूरा गांव दंग रह गया। कुछ ही दिनों में करीब साढ़े चार करोड़ रुपए जुड़ चुके थे। इसकी मदद से आलीशान स्कूल का काम शुरू किया गया।

अब स्कूल में सभी आधुनिक सुविधाएं, संवर रहा बच्चों का भविष्य

इस जनसहयोग से बने नए स्कूल भवन में 21 कक्षाएं हो गईं। दो बड़े हॉल का निर्माण किया गया। एक बड़ा अंडरग्राउंड इंडोर स्टेडियम तैयार किया गया है। विज्ञान प्रयोगशाला, छोटे बच्चों के लिए प्ले एरिया, लगभग 50 लाख रुपये का आधुनिक फर्नीचर और 10 हजार लीटर क्षमता का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि फरवरी में इसका विधिवत उद्घाटन किया जाना है। ऐसे में गांव की कई महिलाएं हर रोज अपने काम से समय निकालकर विद्यालय जाती हैं और वहां साफ-सफाई, रख-रखाव का काम देखती हैं।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि भवन सरकार को सौंपा जाएगा और स्कूल का संचालन शिक्षा विभाग ही करेगा। प्रिंसिपल रामगोपाल शर्मा के अनुसार अब बच्चों को सम्मानजनक, सुरक्षित और प्रेरणादायक माहौल में पढ़ने का अवसर मिलेगा। नरसाणा ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज ठान ले, तो शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है।