
राजस्थान रोडवेज। फोटो- पत्रिका
झालावाड़। रोडवेज बसों को ठेके पर लेने वाले कई बस सारथी एसटीडी गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर रोडवेज की नि:शुल्क यात्रा योजना में फर्जीवाड़ा करके सरकार को भारी चपत लगा रहे थे। पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन राइड के तहत जांच में इसका खुलासा होने के बाद विभिन्न जिलों से इस गिरोह से सात जनों को गिरफ्तार किया है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि 30 जनवरी को पुलिस ने झालावाड़, कोटा और बारां से एसटीडी गिरोह के आठ जनों को पकड़ा था।
यह गिरोह रोडवेज बस के कंडक्टरों के लिए मुखबिरी का काम करता था। गिरोह से पूछताछ और जांच के दौरान पता चला कि गिरोह राजस्थान रोडवेज की बसों में कई बस सारथी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार की नि:शुल्क यात्रा योजना में फर्जीवाड़ा कर रहे थे। वे इस योजना में 50 से 75 फीसदी तक टिकट जारी होना बताकर अपने टारगेट को पूरा होना दिखा रहे थे।
पुलिस ने जांच के बाद गिरोह के सदस्य झालावाड़ निवासी शाहनवाज, झालरापाटन निवासी अंकित गुर्जर, कोटा निवासी राधेश्याम बैरवा, बांसवाड़ा निवासी गिरीश जोशी और उमेश पुरोहित, जोधपुर निवासी नरेन्द्र टांक और केकड़ी निवासी दिनेश वैष्णव को गिरफ्तार किया है। राधेश्याम बैरवा के पास बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षा के प्रवेश पत्र मिले हैं। जिसके आधार पर फर्जी निशुल्क यात्रा टिकट बनाए जा रहे थे। ये परीक्षा प्रवेश पत्र बारां, भीलवाड़ा, मंदसौर, धौलपुर, करौली, चित्तौडग़ढ़, दौसा के अभ्यर्थियों के नाम से प्रदेश के अन्य शहरों के परीक्षा केन्द्र के लिए बने हुए थे।
राज्य सरकार प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए रोडवेज की साधारण एक्सप्रेस बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा देती है। यह सुविधा परीक्षा से दो दिन पूर्व से लेकर दो दिन बाद तक के लिए होती है। छात्र को अपने घर से परीक्षा केन्द्र तक जाने के लिए रोडवेज बस का किराया नहीं देना होता है। चाहे प्रदेश के किसी भी शहर में उसका सेंटर हो। नि:शुल्क यात्रा के लिए अभ्यर्थी को कंडक्टर या बुकिंग काउंटर पर एडमिट कार्ड की फोटो कॉपी तथा खुद की ओरिजनल आइडी दिखानी होती है।
टिकट लेते समय अभ्यर्थी को परीक्षा प्रवेश पत्र की फोटोकॉपी कंडक्टर को देनी होती है। नि:शुल्क टिकट देने के बाद यह फोटोकॉपी कंडक्टर डिपो में जमा कराता है। रोडवेज के स्थायी कंडक्टर और सिविल डिफेंस से लिए गए कर्मचारियों के लिए यह प्रवेश पत्र मायने नहीं रखते। क्योंकि इसकी किराया राशि उनके टारगेट में नहीं जुड़ती, लेकिन बस सारथी के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। वह जितने निशुल्क टिकट जारी करेगा। टिकट की वास्तविक राशि उसके टारगेट में जुड़ जाती है। ऐसे में एसटीडी गिरोह से मिलकर बस सारथी अपने टारगेट का 50 से 75 फीसदी राशि नि:शुल्क टिकट यात्रा का जारी करना बता रहे थे, जबकि वास्तव में वे बस में यात्रियों से पैसा वसूल रहे थे।
Published on:
02 Feb 2026 06:40 pm
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