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Ex-MLA दिव्या मदेरणा ने फोटो-वीडियो किए शेयर, बोलीं, ‘ये अन्याय पूर्ण भी और खतरनाक भी’, जानें क्या है गंभीर मामला?

मामला ओसियां के डांवरा गांव का है. दिव्या मदेरणा ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कुछ फोटो और वीडियो भी शेयर किये हैं।

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जोधपुर/ओसियां। राजस्थान कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने भाजपा की भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। वजह बना है मारवाड़ क्षेत्र में 'हरा सोना' और 'कल्पवृक्ष' के नाम से पहचाने जाने वाले खेजड़ी वृक्ष की कटाई। ओसियां से पूर्व विधायक ने सरकार का ध्यान नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में 100 से अधिक खेजड़ी के पेड़ों को काटने पर आकर्षित किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कुछ फोटो और वीडियो भी शेयर किये हैं।

जानें क्या है मामला?

मामला ओसियां के डांवरा गांव का है, जहाँ एक निर्माणाधीन सोलर प्लांट के लिए नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में 100 से अधिक खेजड़ी के पेड़ों को काट दिया गया। इस पर्यावरणीय विनाश के खिलाफ पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने मोर्चा खोलते हुए इसे मरुधरा की अस्मिता पर हमला करार दिया है।

ये लिखा दिव्या मदेरणा ने

''गत रात्रि ओसियां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डांवरा में नव निर्माणाधीन सोलर प्लांट की आड़ में 100 से अधिक खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई किया जाना अत्यंत निंदनीय है। यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि मरुधरा की जीवनरेखा पर सीधा हमला है।''

''एक तरफ़ बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर पर्यावरण प्रेमी आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ओसियां विधानसभा क्षेत्र के डांवरा में सोलर प्लांट की आड़ में अंधाधुंध खेजड़ी की कटाई की जा रही है। यह दोहरा मापदंड और प्रशासनिक उदासीनता अत्यंत चिंताजनक है।''

''चिंताजनक तथ्य यह है कि इससे पूर्व ओसियां विधानसभा के ग्राम खारी में भी सोलर प्लांट के नाम पर खेजड़ी वृक्षों का विनाश किया गया। जब ग्रामीणों ने इस पर्यावरणीय अपराध के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया, तो दोषी कंपनियों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन ने ग्रामीणों को ही पाबंद किया। यह रवैया न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह खतरनाक संदेश भी देता है कि कानून आम जनता के लिए सख़्त और पर्यावरण विनाश करने वालों के लिए नरम है।''

''वर्तमान में डांवरा में ग्रामीणजन खेजड़ी कटाई के विरोध में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं प्रशासन से स्पष्ट मांग करती हूँ कि ग्रामीणों की सभी जायज़ मांगों को तत्काल स्वीकार किया जाए, दोषी कंपनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और भविष्य में खेजड़ी जैसे संरक्षित वृक्षों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए।''

सोलर प्लांट की आड़ में 'पर्यावरणीय नरसंहार'

ओसियां के डांवरा में ग्रामीणों का आरोप है कि सोलर कंपनियों ने प्लांट की ज़मीन को साफ करने के लिए प्रशासन की नाक के नीचे प्रतिबंधित खेजड़ी के पेड़ों को ज़मींदोज़ कर दिया। पर्यावरण संरक्षण के लिए मशहूर बिश्नोई समाज और स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है।

दिव्या मदेरणा ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नष्ट करने की साजिश है।


'प्रशासन का दोहरा मापदंड चिंताजनक'

पूर्व विधायक ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को घेरते हुए कहा कि एक ओर तो बीकानेर में खेजड़ी बचाने के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन हो रहे हैं, वहीं ओसियां में प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

मदेरणा ने अपने बयान में कहा, "डांवरा में सोलर प्लांट की आड़ में अंधाधुंध खेजड़ी की कटाई निंदनीय है। इससे पहले ग्राम खारी में भी यही अपराध दोहराया गया था, लेकिन प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन ग्रामीणों को ही पाबंद कर दिया जो पर्यावरण बचाने के लिए आवाज़ उठा रहे थे।"

'डांवरा' में धरना, ग्रामीणों की ललकार !

पेड़ों की कटाई के विरोध में डांवरा के ग्रामीण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से कटाई रोकी जाए, काटे गए पेड़ों का मुआवज़ा वसूला जाए और दोषी कंपनियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।

मदेरणा ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों की सभी जायज़ मांगों को तुरंत माना जाए और भविष्य में ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट के लिए खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

विकास बनाम विनाश - आखिर कब थमेगी आरी?

पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा का हब बनना गर्व की बात है, लेकिन इसकी कीमत हमारे 'राजकीय वृक्ष' को देकर चुकाना विनाशकारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर कंपनियां अक्सर लागत कम करने के लिए पेड़ों को शिफ्ट (Translocate) करने के बजाय उन्हें काट देती हैं और मिट्टी में दबा देती हैं।

डांवरा की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या 'ग्रीन एनर्जी' का सपना 'हरे पेड़ों' को काटकर पूरा किया जाना चाहिए?

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

अक्सर देखा गया है कि जब ग्रामीण विरोध करते हैं, तो उन्हें 'विकास विरोधी' बताकर कानूनी कार्रवाई में फंसा दिया जाता है। दिव्या मदेरणा ने प्रशासन के इस रवैये को "खतरनाक संदेश" बताया है। उनके अनुसार, यह संदेश दिया जा रहा है कि कानून आम जनता के लिए सख्त है, लेकिन पर्यावरण का विनाश करने वाले पूंजीपतियों के लिए नरम।