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राजस्थान में अनूठी शादी: दूल्हे को सोने-चांदी की जगह मिला ऐसा तोहफा, अब हो रही चर्चा

विवाह समारोह केवल रस्मों और दिखावे तक सीमित न रहकर समाज को नई दिशा भी दे सकता है, इसका अनुकरणीय उदाहरण हाल ही में राजपुरोहित समाज के एक विवाह समारोह में देखने को मिला।

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फोटो पत्रिका

जोधपुर। विवाह समारोह केवल रस्मों और दिखावे तक सीमित न रहकर समाज को नई दिशा भी दे सकता है, इसका अनुकरणीय उदाहरण हाल ही में राजपुरोहित समाज के एक विवाह समारोह में देखने को मिला। अवसर था खीचन कोट निवासी तथा जोधपुर में सहकारिता निरीक्षक पद पर पदस्थापित महेन्द्र सिंह राजपुरोहित की पुत्री श्रुति के विवाह का। बारात बासनी मनणा निवासी रूप सिंह व इंद्र सिंह के यहां से आई थी।

विवाह के विभिन्न आयोजनों के अंतर्गत समठूनी एवं विदाई समारोह के दौरान, जहां परंपरागत रूप से दूल्हे को सोना-चांदी, महंगे वस्त्र और सौंदर्य प्रसाधन भेंट किए जाते हैं, वहीं ससुर महेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने इस परंपरा से हटकर एक प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने दूल्हे तुषार सिंह को मोटिवेशनल पुस्तकों का गिफ्ट हैंपर भेंट कर समाज को एक सकारात्मक और दूरदर्शी संदेश दिया। यह पहल न केवल युवा पीढ़ी को कॅरियर मार्गदर्शन और आत्मविकास की प्रेरणा देती है, बल्कि समाज को भी सोचने की नई दिशा प्रदान करती है।

पेश किया जड़ों से जुड़ाव का अनुपम उदाहरण

यहीं नहीं, विवाह स्थल की साज-सज्जा में भी महेन्द्र सिंह ने अपनी जड़ों से जुड़ाव का सुंदर परिचय दिया। आमतौर पर जहां एंट्री गैलरी में परिवार की तस्वीरें लगाई जाती हैं, वहीं उन्होंने अपने गांव की झलकियां प्रदर्शित कीं। गांव के प्रमुख और ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीरों को मेहमानों के स्वागत के लिए बनाई गई गैलरी में स्थान देकर उन्होंने अपने गांव के प्रति आत्मीयता और सम्मान को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने खूब सराहा। विवाह समारोह में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र की कई जानी मानी हस्तियां उपस्थित थी।

दिखने में छोटा, मायने बहुत व्यापक

दूल्हे को पुस्तकों का गिफ्ट हैंपर भेंट करना भले ही देखने में एक छोटी पहल लगे, लेकिन इसके मायने बहुत व्यापक और दूरगामी हैं। यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि सोच में बदलाव का प्रतीक है। विवाह समारोह में दी गई यह अनूठी मिसाल यह संदेश देती है कि सामाजिक आयोजनों में दिखावे से अधिक महत्व विचारों, संस्कारों और ज्ञान का होना चाहिए। यही कारण है कि यह पहल न केवल उपस्थित लोगों को प्रभावित कर गई, बल्कि अन्य समाजों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आई है।