
सोनम वांगचुक- गीतांजलि जे. अंगमो। फाइल फोटो- पत्रिका
जोधपुर। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की ओर से सोमवार को सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट ने जेलों में बंदियों की मूलभूत सुविधाओं और मानवीय परिस्थितियों पर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट में सोनम वांगचुक से मुलाकात के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने जेल के भीतर की भीषण ठंड और अमानवीय हालात का विस्तृत वर्णन किया है।
जेल में अपने पति से मिलने पहुंचीं गीतांजलि को सोनम वांगचुक ने बताया कि यह उनके जीवन का सबसे ठंडा अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि लद्दाख जैसे ठंडे क्षेत्र के निवासी होने और अंटार्कटिका तक का अनुभव रखने के बावजूद, जोधपुर सेंट्रल जेल में रात के समय सीमेंट और पत्थर की बड़ी कोठरी में सोना सबसे कठिन रहा। कोठरी में करीब दस खिड़कियां हैं, जिनमें केवल लोहे की सलाखें हैं, शटर नहीं हैं। तेज हवा चलने पर तापमान का वास्तविक अहसास 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो दिल्ली में किसी पुल के नीचे सोने जैसा लगता है।
सोनम वांगचुक ने यह भी बताया कि जेल में बिस्तर, गद्दा या तकिया जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। ठंडे कंक्रीट फर्श पर केवल कंबलों के सहारे रात गुजारनी पड़ती है। हालांकि जेल प्रशासन ने अतिरिक्त कंबल उपलब्ध कराए हैं, लेकिन खिड़कियों से आती ठंडी हवा को रोकने का कोई इंतजाम नहीं है।
उनकी पत्नी के सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर फ्री सोनम वांगचुक नाउ और इनफ इज इनफ जैसे हैशटैग भी जुड़े हैं, जिनमें उनकी रिहाई की मांग करते हुए शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में उनके योगदान को आगे बढ़ाने की अपील की गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि कोठरी के बाहर पाइपों में बहने वाला बोरवेल का पानी लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्थिर रहता है। सोनम वांगचुक ने इसी संसाधन का उपयोग कर शून्य लागत और शून्य कार्बन वाले फ्लोर हीटिंग सिस्टम का विचार साझा किया, जो सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंडक दे सकता है। उनका कहना है कि यह नवाचार देशभर की जेलों के लिए उपयोगी हो सकता है, बशर्ते उन्हें जेल प्रशासन या अदालत से अनुमति और थर्मामीटर जैसे सरल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
Updated on:
09 Feb 2026 06:22 pm
Published on:
09 Feb 2026 06:21 pm
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