
साध्वी प्रेम बाईसा। फाइल फोटो- पत्रिका
जोधपुर। बोरानाडा थानान्तर्गत पाल के आरती नगर स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें किस डॉक्टर की पर्ची पर इंजेक्शन लगाए गए थे। वहीं एफएसएल जांच रिपोर्ट आने में चार से पांच दिन का समय लगने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार मामले में अब तक साध्वी प्रेम बाईसा के पिता बिरमनाथ, इंजेक्शन लगाने वाले कम्पाउण्डर देवीसिंह, पाल रोड स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ सहित 10 से 12 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। कम्पाउण्डर देवीसिंह ने बताया कि उसने 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा को दो इंजेक्शन लगाए थे। उसका कहना है कि ये इंजेक्शन किसी डॉक्टर द्वारा लिखे गए थे।
उधर, जिस निजी अस्पताल में साध्वी को ले जाया गया था, वहां के डॉक्टर प्रवीण जैन ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से साध्वी का इलाज नहीं कर रहे थे। इससे अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर किस डॉक्टर ने इंजेक्शन लिखे थे। एसआईटी प्रभारी एवं सहायक पुलिस आयुक्त (पश्चिम) छवि शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
गौरतलब है कि 28 जनवरी को जुकाम और सांस लेने में परेशानी होने पर कम्पाउण्डर देवीसिंह को आरती नगर स्थित आश्रम बुलाया गया था। कम्पाउण्डर ने साध्वी प्रेम बाईसा को दो इंजेक्शन लगाए थे। कुछ देर के लिए आराम मिलने के बाद साध्वी की तबीयत और बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
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जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की जांच में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग ऑफिसर का कहना है कि उसने निजी अस्पताल की प्रिस्क्रिप्शन स्लिप पर लिखे गए इंजेक्शन लगाए थे, जबकि दूसरी ओर अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने इस तरह के कोई इंजेक्शन नहीं लिखे थे।
Published on:
04 Feb 2026 09:15 pm
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