
Higher education
कटनी। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सोमवार को अल्प प्रवास पर कटनी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए नई शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे परीक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। हालांकि, बातचीत के दौरान मंत्री यूजीसी के विरोध, शंकराचार्य से जुड़े विवाद और कटनी में प्रस्तावित पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से बचते नजर आए।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम के लागू होने से परीक्षा मूल्यांकन की पारंपरिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। अब उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। परीक्षकों को कॉपियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी और छात्र भी चाहें तो मूल्यांकन के बाद अपनी उत्तरपुस्तिका ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि छात्रों का विश्वविद्यालय व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा। मंत्री ने इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक “बड़ा नवाचार” करार दिया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया लगातार जारी है, ताकि शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में नवाचार, कौशल आधारित शिक्षा और बहुभाषी शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्री परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है और यहां विभिन्न भाषाओं व संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। इसी भावना के तहत विश्वविद्यालयों में हिंदी के साथ-साथ तमिल, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, गुजराती जैसी कई भारतीय भाषाओं को जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल इस संदेश को मजबूत करेगी कि भाषाएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं।
कुल मिलाकर, कटनी प्रवास के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने जहां नई शिक्षा नीति और डिजिटल नवाचारों को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट की, वहीं विवादित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। मंत्री की इस रणनीति को प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, जैसे ही मीडिया ने यूजीसी के विरोध से जुड़े सवाल किए, मंत्री का रुख बदलता नजर आया। उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से परहेज किया। इसी तरह शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने साफ कहा कि यह विषय उनके स्तर का नहीं है। कटनी में प्रस्तावित पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज को लेकर चल रहे विरोध पर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मीडिया के सवालों से बचते हुए मंत्री परमार ने यहां तक कह दिया कि वे कैलाश विजयवर्गीय नहीं हैं, जो पत्रकारों के दबाव में बुलवा लिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन विषयों पर वे बोलना नहीं चाहते, उन पर वे कोई बयान नहीं देंगे।
Published on:
28 Jan 2026 09:37 am

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