28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूरिया खाद के लिए भोर से किसानों कर रहे जद्दोजह, दोपहर बाद तक मिल रही खाद

पुरैनी विपणन केंद्र में 300 से अधिक पहुंचे किसान, कई दिन से खाद न मिलने के कारण हो रही थी समस्या मंडी नकद विक्रय केंद्र में भी उमड़ी भीड़, स्थानीय स्तर पर खाद न मिलने के कारण कई किलोमीटर दूसर से शहर आ रहे किसान

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Jan 28, 2026

Khad

Khad

कटनी. पिछले कुछ दिनों से पुरैनी स्थित विपणन केंद्र में किसानों को खाद न मिलने के कारण भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा था। सैकड़ों किसान चक्कर काट रहे थे। जैसे ही मंगलवार को दो ट्रक खाद पहुंची तो यहां पर यूरिया लेने के लिए किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। 300 से अधिक किसान यहां पर खाद लेने के लिए सुबह 5 बजे से पहुंच गए थे। किसान टोकन व खाद के लिए छटपटाते दिखे। सुबह 9 बजे जब कर्मचारियों ने टोकन बांटा तो किसानों ने राहत की सांस ली। दोपहर में फिर खाद लेकर रवाना हुए।
बता दें कि जिले में कई दिनों से खाद की समस्या बनी हुई है। एक सप्ताह पहले बहोरीबंद में किसानों को खाद के लिए रतजगा करना पड़ था। कृषि उपज मंडी पहरुआ स्थित नकद विक्रय केंद्र में भी पर्याप्त खाद न मिलने के कारण किसानों को समस्या होती है। ग्रामीण इलाकों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता व नकद विक्रय केंद्र न होने से किसानों को 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय कर शहर आकर खाद लनेे को विवश हैं।

डिमांड अनुसार नहीं मिली रैक

जिले में भले ही कहने को रैक प्वाइंट है, लेकिन नकद विक्रय केंद्रों में खाद की पर्याप्त उलब्धता न होने के कारण किसानों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस वर्ष यूरिया 38 हजार मैट्रिक टन की डिमांड भेजी गई थी। विगत वर्ष की रबी सीजन की पूर्ति 33 हजार 146 मैट्रिक टन हुई है। बोवनी अधिक क्षेत्र में होने के कारण अधिक डिमांड भेजी गई। अभी तक जिले में 33 से 34 हजार 146 मैट्रिक टन यूरिया मिल चुका है। 2600 मैट्रिक टन की और डिमांड जेडी फर्टीलाइजर भोपाल को भेजी गई है, लेकिन अभी तक जिले को पर्याप्त खाद नहीं मिली है।

कालातीत के कारण सुविधा से वंचित

जिले में 15 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं, जो कालातीत की श्रेणी में हैं। सहकारी समितियों से डिफाल्टर घोषित होने के कारण उनको समितियों से खाद नहीं मिल पा रही है। वहीं दूसरी ओर बाजार में निजी विक्रेताओं को तय मूल्य के अनुसार ही खाद बेचना है, लेकिन अधिक महंगी बेच रहे हैं, जिससे किसान लुटता है। नकद विक्रय केंद्र में वाजिब दाम में यूरिया मिलने के कारण यहां पर भीड़ उमड़ रही है।

बारी आने का करते रहे इंतजार

पहले यहां पर किसान टोकन के लिए कतार में लगकर इंतजार करते रहे। इसके बाद केंद्र में राशि जमा कर दखा प्राप्त करने के लिए कई घंटे तक इंतजार करते रहे। टोकन नंबर से अलाउंस होने पर किसानों ने रुपए जमा कर आधार कार्ड के अनुसार पीओएस मशीन में एंट्री के बाद खाद प्राप्त कर घर लौटेे।

ट्रक के पहुंचते ही बंधी आस

जैसे ही विपणन केंद्र में खाद से लदे दो ट्रक पहुंचे तो किसानों को खाद मिलने की आस बंधी। किसान ट्रक के खाद उतरने का इंतजार करते रहे कि अनलोडिंग हो और उनको खाद मिले तो वे खेतों में लेजाकर डालें, ताकि फसल बेहतर हो सके।

किसानों की समस्या का नहीं रखा जा रहा ध्यान

जिले में खाद का रैक प्वाइंट होने के बावजूद किसानों को समय पर यूरिया खाद नहीं मिलना, प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। रैक पहुंचने की सूचना के बाद भी डबल लॉक गोदामों में सीमित वितरण व्यवस्था किसानों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नहीं है। किसानों को रातभर लाइन में लगने और खुले आसमान के नीचे ठंड में सोने की मजबूरी, व्यवस्था की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। जिले में पर्याप्त आवक के बावजूद खाद का बाजार से गायब रहना, कालाबाजारी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। निजी विक्रेताओं द्वारा ऊंचे दामों पर खाद उपलब्ध कराने की शिकायतें किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। टोकन प्रणाली की सीमित संख्या से वास्तविक जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।

वर्जन

जैसे-जैसे खाद प्राप्त हो रही है वह समितियों व डीलरों को भेजी जा रही है। अभी चंबल से एक रैक प्राप्त हुई है, जिसमें 1300 मैट्रिक टन यूरिया था। 70 प्रतिशत सहकारिता, 30 प्रतिशत निजी क्षेत्र में भेजी गई है। जल्द ही कोरो मंडल फर्टीलाइजर की एक रैक 1900 मैट्रिक यूरिया जिले को प्राप्त होगी, जिससे किसानों को और राहत मिलेगी।

संबंधित खबरें

अरुणिमा सेन, उप संचालक कृषि।