
Mechanical engineer doing fisheries
कटनी. इंजीनियरिंग की डिग्री को आमतौर पर शहरी नौकरी से जोडकऱ देखा जाता है, लेकिन कटनी विकासखंड के ग्राम खिरहनी (झलवारा) निवासी मैकेनिकल इंजीनियर सुधीर चंद्राकर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने अपनी तकनीकी समझ, गणनात्मक सोच और प्रबंधन कौशल का उपयोग कर मछली पालन को एक सटीक और लाभकारी इंजीनियरिंग मॉडल में बदल दिया।
37 वर्षीय सुधीर चंद्राकर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई के बाद यह समझ लिया था कि केवल नौकरी ही इंजीनियर की मंजिल नहीं होती। उत्पादन, लागत, आउटपुट और रिस्क एनालिसिस जैसी इंजीनियरिंग अवधारणाओं को उन्होंने कृषि आधारित व्यवसाय में लागू करने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने मत्स्योद्योग विभाग से संपर्क किया और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी प्राप्त की। वर्ष 2023-24 में सुधीर ने अपनी 0.10 हेक्टेयर भूमि पर बायोफ्लॉक तकनीक से तालाब का निर्माण किया। यह पूरी यूनिट उन्होंने इंजीनियरिंग अप्रोच से डिजाइन की। ऑक्सीजन लेवल, फीड कन्वर्जन रेशियो, पानी की गुणवत्ता और लागत-लाभ का निरंतर विश्लेषण किया। परिणामस्वरूप पहली ही यूनिट से करीब 2500 किलोग्राम पंगेशियस मछली उत्पादन हुआ, जिससे 2.50 लाख रुपए की आय और 1.50 लाख रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
सफलता के बाद सुधीर ने बिना जोखिम बढ़ाए, चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2024-25 में दूसरी यूनिट शुरू की। वर्तमान में उनकी दो बायोफ्लॉक यूनिट सालाना लगभग 10 मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर रही हैं। इससे उन्हें करीब 8.40 लाख रुपए की शुद्ध वार्षिक आय हो रही है। सुधीर बताते हैं कि यह विस्तार पूरी तरह डेटा, अनुभव और इंजीनियरिंग गणना पर आधारित है।
सुधीर चंद्राकर आज सिर्फ एक मत्स्य पालक नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन करने वाले इंजीनियर बन चुके हैं। वे स्थानीय मछुआरों को तालाब से ही मछली विक्रय का अवसर देते हैं और श्रमिकों को नियमित काम उपलब्ध करा रहे हैं। सुधीर की कहानी बताती है कि इंजीनियरिंग डिग्री केवल मशीनों तक सीमित नहीं है। सही सोच और तकनीकी दृष्टि से इंजीनियर खेत, तालाब और गांव को भी मुनाफे का मॉडल बना सकता है।
Published on:
10 Feb 2026 10:07 am
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