9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बोर्ड व प्रतियोगी परीक्षाओं पर भारी पड़ रहा कानफोड़ू डीजे, नियमों की उड़ रहीं धज्जियां

रात 10 बजे के बाद भी खुलेआम शोर, बच्चों-बुजुर्गों की सेहत पर खतरा

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Feb 09, 2026

Violation of rules by playing DJ

Violation of rules by playing DJ

कटनी. जिले में बोर्ड परीक्षाओं से लेकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है। छात्र-छात्राएं दिन-रात मेहनत कर पढ़ाई में जुटे हैं, लेकिन उनकी इस मेहनत पर कानफोड़ू डीजे भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजनों और शादी-विवाह में नियमों को ताक पर रखकर तेज आवाज में डीजे बजाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि रात 10 बजे के बाद भी होटलों और मैरिज गार्डनों में डीजे की तेज आवाज गूंजती रहती है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम (कोलाहल एक्ट) के तहत रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध है। निर्धारित समय में भी तय डेसीबल से अधिक आवाज में ध्वनि यंत्र बजाना अपराध की श्रेणी में आता है। नियमों के अनुसार अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और परीक्षा केंद्रों के आसपास साइलेंट जोन घोषित हैं, जहां डीजे या तेज आवाज पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके कटनी में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर

तेज डीजे का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ रहा है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि देर रात तक शोर होने के कारण पढ़ाई में एकाग्रता नहीं बन पा रही। कई छात्र नींद पूरी न होने की शिकायत कर रहे हैं, जिससे उनकी याददाश्त और मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को शांत माहौल देना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन जब बाहर ही शोर का आतंक हो तो घर के अंदर पढ़ाई कर पाना मुश्किल हो जाता है।

बुजुर्गों की सेहत पर खतरा

कानफोड़ू डीजे सिर्फ छात्रों ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए भी गंभीर समस्या बन रहा है। चिकित्सकों के अनुसार तेज आवाज से उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्या, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। कई बुजुर्गों ने बताया कि रातभर शोर के कारण सिरदर्द और घबराहट की समस्या बढ़ रही है, लेकिन शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।

नाममात्र की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार पिछले एक सप्ताह में कुठला थाना पुलिस द्वारा केवल एक ही कार्रवाई डीजे के खिलाफ की गई है। जबकि हकीकत यह है कि रात 8 बजे से लेकर 12 बजे और कई बार आधी रात के बाद तक मैरिज गार्डनों और होटलों में डीजे बजते रहते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस और प्रशासन को यह शोर सुनाई नहीं देता या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

कोलाहल एक्ट के तहत क्या है कार्रवाई का प्रावधान

कोलाहल अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर डीजे जब्त करने, आयोजक पर जुर्माना लगाने और आवश्यकता पडऩे पर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। बार-बार उल्लंघन की स्थिति में आयोजक और डीजे संचालक दोनों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। शहरवासियों का कहना है कि पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो परीक्षार्थियों की तैयारी और नागरिकों की सेहत दोनों पर इसका दुष्परिणाम पड़ेगा।

वर्जन

नियम अनुसार ही डीजे बजें यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बच्चों की परीक्षा में व्यवधान न हो। सभी थाना प्रभारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।

अभिनय विश्वकर्मा, एसपी।