
AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर
Kota Crime: कोटा के चेचट थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका का बाल विवाह कराने के मामले में राजस्थान पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने दोबारा सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर के निर्देशों पर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को संरक्षण में लिया है।
जांच के दौरान सामने आया कि नाबालिग का विवाह 23 जनवरी को उसके ताऊ द्वारा झालावाड़ निवासी युवक से कराया गया था। बालिका ने पूछताछ में बताया कि इस विवाह के लिए उसके परिजनों ने वर पक्ष से करीब दो लाख रुपए की राशि ली थी।
ये खुलासा होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा, चाइल्ड हेल्पलाइन को-ऑर्डिनेटर नरेश मीणा, काउंसलर महिमा पांचाल एवं सृष्टि सेवा समिति के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर भूपेंद्र सिंह की संयुक्त टीम ने कैथून थाना पुलिस की मदद से बूटा सिंह कॉलोनी में दबिश दी और पुलिस की सहायता से बालिका को तलाश कर संरक्षण में लिया गया।
काउंसलिंग के दौरान नाबालिग ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर पहले भी प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन परिजनों ने उसके स्थान पर उसकी बड़ी बहन को दुल्हन बताकर पेश कर दिया था। इस तरह टीम को गुमराह कर बाल विवाह के तथ्य छिपा लिए गए थे। बाद में शिकायतकर्ता की सूचना पर मामला दोबारा उजागर हुआ।
संरक्षण में लेने के बाद बालिका को बाल कल्याण समिति कोटा के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ और सदस्य बाबूलाल मेहरा के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले की जांच और अग्रिम आदेश तक बालिका को राजकीय बालिका गृह में अस्थायी आश्रय देने के निर्देश दिए हैं।
बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि बालिका के विवाह को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत शून्य घोषित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही बाल विवाह कराने, राशि लेने और तथ्य छिपाने में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 30 जनवरी को इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ‘नाबालिग की सूचना पर पहुंची टीम, परिजनों ने दुल्हन ही बदल दी’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद ग्रामीण पुलिस और जिला प्रशासन ने दोबारा जांच शुरू कर पूरे मामले की परतें खोलीं। प्रशासन का कहना है कि बाल विवाह जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह करना कानून अपराध है। जिस युवक ने बालिका से विवाह किया है उसके खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जो भी इसमें शामिल है उन सभी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सुजीत शंकर, एसपी कोटा ग्रामीण
Updated on:
05 Feb 2026 10:18 am
Published on:
05 Feb 2026 10:17 am
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